11. बंबई पुलिस अधिनियम-संशोधन विधेयक - Page 169

152 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

शामिल है, मैं आदर के साथ उनका ध्यान डिफेंस ऑफ द रेल्म एक्ट जो इंग्लैंड में और डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट जो भारत में युद्ध के दौरान पारित हुए थे, की ओर दिलाना चाहता हूं। ये दोनों आपातकालीन उपाय थे और अगर उन भद्र पुरुषों में से कोई अधिनियम के प्रावधानों को पढ़ते तो वे जान जाते कि यह संशोधन बहुत नरम संशोधन है और इसे भी याद रखना चाहिए कि यह आपातकालीन विधान — ‘डिफेंस ऑफ रेल्म एक्ट’ और ‘डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट’ — चार साल तक बने रहे। ‘डिफेंस ऑफ रेल्म एक्ट’ 1914 में पारित हुआ और 1919 तक नहीं हटाया गया तथा पुलिस अफसरों को दिए गए अधिकार इस संशोधन के प्रस्तावित अधिकारों से काफी ज्यादा थे। मैं उस समय एक छात्र के रूप में इंग्लैंड में था। इसलिए आपातकाल का ध्यान रखते हुए मैं निवेदन करता हूं कि जो अधिकार पुलिस आयुक्त को दिए गए हैं, वे अनुचित रूप से व्यापक नहीं कहे जा सकते हैं।

दूसरे मामलों में संबंध जैसे कि यह एक स्थाई उपाय है, मैं सदन का ध्यान भारत सरकार अधिनियम की धारा 102 में शामिल प्रावधानों की ओर आकर्षित करता हूं, जो इस अवसर के लिए बहुत ही उपयुक्त और प्रासंगिक हैं। भारत सरकार अधिनियम की धारा 102 में ठीक वही है, जो यह संशोधन प्रस्तावित करता है। उसमें भी गवर्नर जनरल को अपने स्व-विवेक से आपातकाल की घोषणा करने का अधिकार दिया गया है और उस घोषणा के दौरान गवर्नर जनरल शांति और व्यवस्था को बरकरार रखने के लिए कोई भी कानून जरूरी अध्यादेश द्वारा पारित करने के लिए अधिकृत है...

माननीय मोहम्मद खान देहलवी : जिसे देश स्वीकार नहीं करता है।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : खैर, यह भारत सरकार अधिनियम में शामिल है। इसी प्रकार, उसी धारा में एक प्रावधान है कि आपातकाल की घोषणा छह महीने तक ही लागू रहेगी। मैं संगत प्रावधानों को पढूंगा :

इस अध्याय की पूर्व धाराओं की किसी भी बात के रहने के बावजूद यदि गवर्नर

जनरल ने स्व-विवेक से घोषणा द्वारा यह प्रख्यापित किया है कि इस अधिनियम

में ‘आपातकाल की घोषणा’ के रूप में उल्लिखित गंभीर आपातकाल की स्थिति

बनी हुई है, जिससे भारत की सुरक्षा को युद्ध अथवा आंतरिक गड़बड़ के कारण

चुनौती मिली है, तो संघीय विधान पालिका को यह अधिकार होगा कि वह राज्य

या उसके किसी हिस्से के लिए प्रांतीय विधायी सूची (प्रोविंशियल लेजिस्लेटिव

लिस्ट) में गिनाए गए किन्हीं मामलों से संबंधित कानून बना सके।

उपखंड (4) के अनुसार :

संघीय विधायिका द्वारा बनाया गया कानून जिसे वह अन्यथा नहीं बनाती, लेकिन

आपातकाल की घोषणा के मुद्दे की वजह से जिसे बनाने के लिए यह सक्षम बनी

है, इस घोषणा के प्रभावी न रहने के बाद छह महीने की अवधि की समाप्ति के