11. बंबई पुलिस अधिनियम-संशोधन विधेयक - Page 171

154 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

पर ‘कम्यूनिटी’ शब्द धार्मिक संप्रदाय (समाज) के अर्थ में ही प्रयुक्त होता है। इसका अभिप्राय उन व्यक्तियों से होना प्रतीत होता है, जो किसी धार्मिक संप्रदाय (समाज) के सदस्य हैं। धार्मिक संप्रदाय ‘कम्यूनियन’ एक धार्मिक शब्द है। कोई व्यक्ति उस समय धार्मिक समाज का अंग नहीं रहता, जब किसी धर्माधिकारी द्वारा समाज से उसका बहिष्कार कर दिया जाता है, उसका संप्रदाय में रहना समाप्त हो जाता है। यह इस शब्द की उत्पत्ति का मूल है। मैं इस बात से पूर्णतः सहमत हूं कि यह ऐसा शब्द नहीं है, जिसका श्रम, हड़ताल या किसी अन्य परिस्थिति में प्रयोग किया जाए। अतः मैं यह कहना चाहता हूं कि अगर मेरे विद्वान और माननीय मित्र सोचते हैं कि यही पर्याप्त नहीं है और दूसरा शब्द जरूरी है, तो मैं उस स्थिति में उनकी पूरी मदद करने के लिए तैयार हूं। इन शब्दों के साथ मैं अपना वक्तव्य समाप्त करता हूं।

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डॉ. भीमराव अम्बेडकर * : महोदय! मैं समझता हूं कि मेरे द्वारा प्रस्तुत संशोधन में, जैसा कि यह प्रस्तुत किया गया है, एक बहुत ही सारगर्भित अंश नहीं है, जिसको मैं शामिल करना चाहता था, क्योंकि सम्मेलन के समय जो प्रारूप मुझे दिया गया था, मैं उस पर काम कर रहा था। अगर आप मुझे मेरे संशोधन में अनुपूरक जोड़ने की अनुमति दें, तो यह पूर्ण हो जाएगा। संशोधन इस प्रकार है :

खंड 2, उपखंड (1) (I) में निम्नांकित को उपखंड (क) जो ‘कि यह उपस्थिति’

आदि से प्रारंभ होता है के स्थान पर जोड़ दें, अर्थात् :

(क) कि बंबई नगर की सीमा में कोई व्यक्ति आदतन गैरकानूनी कामों में लगा

हुआ है, जो नगरवासियों के लिए एक खतरा है और जो इतना दुस्साहसी और

खतरनाक है कि शहर में उसकी मुक्त उपस्थिति संकट पैदा करने वाली है और

जो बल प्रयोग या हिंसा अथवा भारतीय दंड संहिता के अध्याय 12, 16 अथवा 17

के तहत किसी दंडनीय अपराध में आदतन संलग्न है और जिसके विरुद्ध आयुक्त

के विचार में गवाह खुलकर गवाही देने के लिए आगे नहीं आते हैं, या

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डॉ. भीमराव अम्बेडकर ** : महोदय! इससे पहले कि मैं अपने संशोधन के समर्थन में अपनी बात कहूं, मेरे लिए शायद यह जरूरी है कि मैं दो प्रारंभिक टिप्पणियां करूं। पहली टिप्पणी जो मैं करना चाहता हूं, वह यह है। इस अधिनियम की धारा 27 में संशोधन के लिए मेरे मित्र माननीय गृह मंत्री जो विधेयक लाए हैं, उसका समर्थन मैं क्यों करता हूं, इसका कारण यह है। कल की बहस के दौरान बहुत कुछ कहा जा चुका है कि यह संशोधन पुलिस आयुक्त को मूलधारा 27 द्वारा प्रदत्त अधिकारों से ज्यादा अधिकार देता है। समग्र विधेयक के अनुप्रयोग को देखते हुए

w खंड 3, पृ. 2509-12, 28 अप्रैल 1938