11. बंबई पुलिस अधिनियम-संशोधन विधेयक - Page 172

बंबई पुलिस अधिनियम-संशोधन विधेयक

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मुझे इस बारे में थोड़ी भी शंका नहीं है कि संशोधित धारा 27 मौजूदा धारा 27 से बहुत ही नरम होगी।

इसीलिए मैं आदेशों के निलंबन के लिए और इस अधिनियम को पारित करने में गृह मंत्री महोदय की मदद करने के लिए सहमत हुआ।

मैं जो दूसरी टिप्पणी करना चाहता हूं, वह यह है। पार्टियों के सम्मेलन में जहां हम लोगों के बीच इस संशोधन पर बहस हुई, मैंने यह जरूर कहा था कि मैं इस उपाय का समर्थन करूंगा। जिन प्रस्तावों पर बहस के समय उन पर सहमति हो गई थी, मेरे मित्र गृह मंत्री महोदय कहेंगे कि सम्मेलन में यह रुख अपनाने के बाद अब मेरा इसमें संशोधन प्रस्तुत करना कुछ अटपटा सा लगता है। महोदय! मैं इसको स्पष्ट करना चाहता हूं। जब मैं गृह मंत्री महोदय का समर्थन करने को सहमत हुआ, तब तक संशोधन इस विधेयक के सिद्धांतों तक ही सीमित था। विधेयक में समाविष्ट सिद्धांत, यदि मैं इस विधेयक को ठीक-ठीक समझता हूं, तो वह ऐसा है। बंबई नगर में कुछ अपराधी सक्रिय हैं, जिनके आतंक से पीडि़त खुद अदालत में गवाही देने आगे नहीं आते। इसलिए नियमित मुकदमा नहीं चल पाता। यही जैसा कि मैंने कहा है, विधेयक का सिद्धांत है। मैं भी उसकी मुख्य बात की सत्यता पर कायम हूं। मैं अपने सिद्धांत से भटक नहीं रहा। मैं सिर्फ यही कहना चाहता हूं कि ऐसे व्यक्तियों की कोटि निश्चित की जाए, जिसके खिलाफ पुलिस आयुक्त बिना किसी नियमित मुकदमें के कार्रवाई कर सकता है, क्योंकि उनके विरुद्ध सूचना देने वाले अदालत के सामने आने के लिए तैयार नहीं हैं। इसलिए मेरी राय में संशोधन तफसील का संशोधन है, न कि कोई सिद्धांतगत संशोधन।

अब, महोदय! संशोधन पर आते हुए सबसे पहले जिस बात की ओर मैं सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं वह यह है। इसका पाठ इस प्रकार है :

कि किसी व्यक्ति की बंबई नगर में उपस्थिति, गतिविधियां या चेष्टाएं जिससे/

जिनसे खतरा या संकट उत्पन्न होता है अथवा जिनसे ऐसा होने का अंदेशा है

या जिसका ऐसा करने का प्रयत्न है या पर्याप्त संदेह उत्पन्न करते हैं कि यह

व्यक्ति गैर-कानूनी प्रवृत्तियों को प्रश्रय दे रहा है।

इस पर ध्यान दें कि इसकी भाषा अत्यधिक नरम है। दूसरे मुझे ऐसा लगता है कि वह व्यक्ति जो एकमात्र गैर-कानूनी काम करता है, जिसके फलस्वरूप खतरा या संकट या पर्याप्त संदेह उत्पन्न होता है, तो पुलिस आयुक्त को जो अधिकार हम दे रहे हैं, उसके तहत वह उसे पकड़कर तड़ीपार कर सकता है। मुझे विश्वास है कि न तो गृह मंत्री महोदय का यह इरादा था और न ही मेरी ऐसी मंशा थी। अगर मैं माननीय गृह मंत्री का दृष्टिकोण ठीक-ठीक समझा हूं, तो उन्होंने अपने विधेयक संचालन भाषण में कहा था कि प्रस्तावित संशोधन के तहत अधिकार मांगने का उनका