11. बंबई पुलिस अधिनियम-संशोधन विधेयक - Page 179

162 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

कि आपत्तियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसके अलावा यदि अपील

करने का अधिकार छीना जाता है, तो अभिकरणों के पास अधिकतम शक्ति और

अधिकार होने चाहिए।

अगर यह रक्षोपाय यह देखने के लिए आवश्यक है कि क्रांतिकारियों के प्रति कठोर व्यवहार और अन्याय नहीं होना चाहिए, तो मेरा निवेदन है कि सामान्य बुद्धि वाला प्रत्येक आदमी सोचेगा कि विधेयक में वर्णित लोगों के लिए ज्यादा रक्षोपाय की आवश्यकता है। आखिरकार, संशोधन की क्या मांग है? संशोधन यह नहीं चाहता कि जिस व्यक्ति पर आरोप लगाकर पुलिस आयुक्त उसे नगर से निकाल देना चाहता है, उसकी जांच करने के लिए मजिस्ट्रेटों से गठित अभिकरण हो। ऐसी कोई मांग नहीं की गई है और न ही संशोधन यह मांग करता है कि मजिस्ट्रेट के समने सामग्री पेश किए जाने पर उसकी जांच इस प्रकार की जानी चाहिए, मानो यह मुकदमा हो। संशोधन में यह अपेक्षा नहीं की गई है कि पुलिस आयुक्त मजिस्ट्रेट के सामने जब सामग्री पेश करता है, तब यह जानकारी देने वालों का नाम प्रकट करे। इस प्रकार की कोई मांग नहीं रखी गई है। संशोधन बहुत ही नरम है। यह मजिस्ट्रेट से अपेक्षा नहीं रखता कि वह पुलिस आयुक्त द्वारा प्रस्तुत सामग्री पर फैसला दे। इससे जो कुछ अपेक्षा रखी गई है, वह यह है कि मजिस्ट्रेट इसकी जांच कर सकता है और यह प्रमाण-पत्र दे सकता है कि यह संतोषजनक मामला है, जिसके अनुसार पुलिस आयुक्त यदि चाहे तो कार्यवाही कर सकता है। महोदय! अब मैं हर दृष्टि से यह कहने के लिए तैयार हूं कि यह रक्षोपाय सबसे नरम है, जिसे मुहैया किया जा सकता है और किया जाना चाहिए। मेरा निवेदन है कि इस तथ्य के मद्देनजर माननीय सदस्य श्री पाटस्कर का संशोधन अभी पारित हो गया है और पुलिस आयुक्त के अधिकार और ज्यादा व्यापक हो गए हैं जो कि मेरे संशोधन के पारित होने की स्थिति में इतने व्यापक नहीं होते — विपक्ष और समूचे सदन पर यह जिम्मेदारी आ जाती है कि क्या इस छोटे रक्षोपाय — मैं इसे बहुत छोटा रक्षोपाय कहता हूं — का प्रावधान विधेयक में किया गया है, ताकि यह देखा जा सके कि पुलिस आयुक्त मनमाने ढंग से व्यवहार न करे।

III *

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : मेरा निवेदन है कि माननीय सदस्य श्री पाटस्कर के संशोधन को स्वीकार करके हमने जो किया है, वह यह है कि पुलिस आयुक्त के लिए निर्देश के रूप में ऐसे मामले निर्दिष्ट किए हैं, जिनमें वह उन अधिकारों का उपयोग कर सकता है, जो उसे दिए गए हैं। इस निर्देश के अनुसार वह अपने अधिकारों का उपयोग केवल उन्हीं मामलों में करेगा, जिनमें उसके विचार में गवाह किसी व्यक्ति के खिलाफ खुलकर गवाही देने के लिए तैयार नहीं है। वहीं उसको दिया गया निर्देश यह है कि उसे केवल उन मामलों में अपने अधिकारों का उपयोग करना है, जिनमें गवाह सुरक्षा कारणों से गवाही देने के लिए आगे आना नहीं चाहते। उपखंड (2)