164 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
में रखा है कि क्या गवाह आने को तैयार हैं। उच्च न्यायालय या मजिस्टीरियल कोर्ट इस प्रश्न पर अड़ंगा नहीं लगा सकते कि गवाह आने को तैयार क्यों नहीं है। यह भी अड़ंगा नहीं लगाया जा सकता कि आधार संतोषप्रद नहीं है। निर्णय का अंतिम अंश पुलिस आयुक्त के हाथ में है। माननीय श्री भोले का संशोधन है कि वह इस
खंड में उस शर्त को लाना चाहते हैं, जिसे हमने माननीय सदस्य श्री पाटस्कर के संशोधन को पारित करके शामिल कर लिया है, और जो प्रक्रिया संबंधी शर्त है, ताकि विधेयक अपने में संपूर्ण हो जाए। हमारे द्वारा पारित संशोधन और माननीय सदस्य श्री भोले के संशोधन के बीच कोई टकराव नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि आयुक्त के हिसाब से शब्दावली जोड़ी जाए। मैं संशोधन प्रस्तुत करता हूं।
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डॉ. भीमराव अम्बेडकर * : महोदय! क्या मैं स्पष्ट कर सकता हूं? संक्षेप में स्थिति यह है कि हमने उपखंड (7) के तहत अदालत को दो बार कुछ निश्चित अधिकार दिए हैं, जब कोई व्यक्ति आयुक्त के आदेश को न मानने के कारण मजिस्ट्रेट के सम्मुख लाया जाता है, तो मजिस्ट्रेट को यह देखने का अधिकार है कि उचित प्रक्रिया का अनुसरण किया गया है या नहीं। प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट को यह देखना होता है कि क्या मजिस्ट्रेट के सामने सामग्री मौजूद थी। यह खंड बताता है कि जब मामला प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट के सामने लाया जाता है, तब आयुक्त या किसी अन्य व्यक्ति को अदालत में गवाह के कटघरे में यह बताने के लिए जाना पड़ेगा कि उसके पास कुछ सामग्री है, जिसके आधार पर वह कार्रवाई कर सकता है। यह खंड कहता है कि यह गवाही देते समय पुलिस आयुक्त या किसी ऐसे अधिकारी को जिसे वह प्रतिनियुक्त करता है, उस व्यक्ति की पहचान या संपत्ति की पहचान करनी होगी। मैं उपखंड (8) के अधिकार क्षेत्र की व्याख्या कर रहा हूं; खंड (8) का क्षेत्र यह है कि यह तब लागू होता है, जब यह देखने के लिए कि क्या यह सही है या नहीं, मजिस्ट्रेट द्वारा आदेश पर विचार किया जा रहा हो; और यह कि क्या यह आदेश प्रक्रिया के अनुकूल दिया गया है। मजिस्ट्रेट को यह देखना है कि क्या आयुक्त के समक्ष कोई सामग्री थी, क्योंकि वह भी एक शर्त है, और यह सिद्ध करने के लिए कि सामग्री क्या थी, यह प्रश्न उठ सकता है कि क्या पुलिस आयुक्त इसके लिए बाध्य है कि वह सभी सूचना जिसमें व्यक्ति या संपत्ति की शिनाख्त संबंधी सूचना भी शामिल होगी, मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत करे। इस खंड के अनुसार गवाही देते समय पुलिस आयुक्त ऐसी सूचना देने से इंकार कर सकता है, जो उसके पास हो और व्यक्ति या संपत्ति की पहचान करा सकती हो। उपखंड (8) का अधिकार क्षेत्र यही है।
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डॉ. भीमराव अम्बेडकर * : महोदय! मैं इस संशोधन को प्रस्तुत करना चाहता