11. बंबई पुलिस अधिनियम-संशोधन विधेयक - Page 182

बंबई पुलिस अधिनियम-संशोधन विधेयक

हूं, अर्थात् —

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इसके आगे आने-वाले ‘शब्दों के स्थान पर निम्नांकित शब्द प्रतिस्थापित किए

जाएंगे और आदतन खतरनाक व्यक्तियों से निपटने और सांप्रदायिक दंगों के

दौरान शांति और व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से’

मैं यही संशोधन प्रस्तुत करना चाहता हूं।

माननीय अध्यक्ष : मैं अभी माननीय सदस्य, विद्वान डॉक्टर के उस संशोधन का उल्लेख कर रहा था, जिसमें उन्होंने यह अधिनियम आदतन अपराधियों पर लागू होने का प्रस्ताव किया था। मेरा यही विचार है कि सदन द्वारा किए गए निर्णयों के मद्देनजर संशोधन का यह भाग भी निरर्थक होगा।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : महोदय! मैं निवेदन करना चाहता हूं कि यह बिल जो अभी सदन के सम्मुख है, इसके दो उद्देश्य हैं, अर्थात् पहला उद्देश्य है, सांप्रदायिक दंगों से निपटना, और इसलिए मेरा निवेदन है कि मेरे संशोधन का वह भाग जिसमें सांप्रदायिक दंगों का उल्लेख है, पूरी तरह व्यवस्था-सम्मत है। यह विधेयक उन निश्चित प्रावधानों पर भी विचार करता है, जिनका आशय या परिकलन माननीय गृह मंत्री के उन शब्दों से है, जो ‘मवाली’ समझे जाते हैं, और मेरा मानना है कि इसका अनुवाद ‘आदतन खतरनाक व्यक्ति’ हो सकता है। मेरे संशोधन का तात्पर्य इस दोहरे उद्देश्य वाले विधान को स्पष्ट करना है। इसका एक उद्देश्य तो सांप्रदायिक दंगों से निपटना है और दूसरा उद्देश्य उनसे निपटना है जो ‘मवाली’ कहे जाते हैं। इसलिए मेरा निवेदन है कि मेरा संशोधन व्यवस्था के अनुरूप है। अगर फिर भी, यह आपत्तिजनक है, तो मैं ‘मवालियों की करतूतों के नियंत्रण के उद्देश्य से’ वाक्यांश का प्रयोग करने के लिए तैयार हूं।

माननीय अध्यक्ष : उसके संबंध में कठिनाई यह होगी कि मवाली शब्द अधिनियम में परिभाषित नहीं है। यह वैसी अभिव्यक्ति नहीं है, जिसे किसी भी अधिनियम में परिभाषित किया गया हो।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : महोदय! मेरा निवेदन है कि प्रस्तावना का न्यायिक निर्वचन नहीं होने जा रहा है। प्रस्तावना में केवल वे निर्देशक नियम होते हैं, जिसके उद्देश्य के लिए हम इस अधिनियम का उपयोग करने वाले हैं, और इसलिए मेरा निवेदन है कि हालांकि ‘मवाली’ शब्द न्यायिक रूप से व्याख्यायित नहीं है, तो भी गृह मंत्री महोदय और पुलिस इस शब्द से इतनी अच्छी तरह परिचित हैं कि मैं समझता हूं कि इसके संबंध में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए।

माननीय अध्यक्ष : संशोधन को दो हिस्सों में बांटा गया है। एक जो आदतन अपराधी के बारे में उल्लिखित अंश है, जैसा कि माननीय सदस्य ने कहा है, जिसे

* बोंबे लेजिस्लेटिव असेम्बली डिबेट्स, खंड 3, पृ. 2807-08, 3 मई 1938