11. बंबई पुलिस अधिनियम-संशोधन विधेयक - Page 183

166 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

हटाने के लिए मैं समझता हूं, माननीय सदस्य तैयार हैं।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : मैं इसको बांटने को तैयार हूं। एक तो ऐसे लोगों से जो या तो खतरनाक चरित्र या मवाली हैं, निपटने वालों में और दूसरे वे जिनके बारे में मेरा मानना है कि संशोधन का वह अंश आपातकाल के अधिकार देता है, उससे सीधा उल्लेख है।

माननीय अध्यक्ष : दूसरे, मैं देख सकता हूं कि अगर दो हिस्सों में बांटा गया है, तो पहले के बारे में मैं समझता हूं कि ‘मवाली’ अभिव्यक्ति का प्रयोग भी नहीं . . .

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : तब मेरा संशोधन यह होगा कि खतरनाक चरित्र के व्यक्तियों से निपटने के लिए मैं ‘आदतन’ शब्द को वापस लेने के लिए तैयार हूं। प्रस्तावना का उद्देश्य हमारे इरादों को स्पष्ट करना है।

श्री जमनादास मेहता : मेरा निवेदन है कि विद्वान डॉक्टर के संशोधन को पूरी व्यवस्था में ही ग्रहण किया जाए, क्योंकि यह अब अनुभव किया जा रहा है कि समूचे विधेयक के दो उद्देश्य हैं - एक आपातकाल से निपटना और दूसरा उन दुष्चरित्रों से निपटना जिनकी चर्चा अधिनियम में की गई है। प्रस्तावना में यह अभिव्यक्त होना चाहिए, जिसे सदन ने अधिनियम बनाया, अन्यथा, प्रस्तावना अधूरी होगी और यह अभिव्यक्त नहीं कर पाएगी कि विधेयक का उद्देश्य क्या है।

माननीय अध्यक्ष : मैं किसी तकनीकी आपत्ति पर विचार नहीं कर रहा हूं। मैं यह विचार कर रहा हूं कि शब्दावली उस बात को कैसे अभिव्यक्त करेगी, जो विधेयक में कही गई और जिसे सदन के द्वारा पारित कर दिया गया है।

माननीय श्री बी.जी. खेर : क्या मैं माननीय सदस्य को यह बता सकता हूं कि ‘खतरनाक’ शब्द अस्पष्ट है? इसे ‘समाज के लिए खतरनाक’, ‘नगर के लिए खतरा’ या इसी अर्थ से संबंधित कुछ और होना चाहिए। हमें ऐसे तार मिलते हैं कि फलां-फलां

खतरनाक हैं, शीघ्र प्रारंभ कीजिए। ‘खतरनाक’ शब्द अपने आप में अस्पष्ट है।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : उन व्यक्तियों से निपटने के उद्देश्य से जो बंबई नगर के निवासियों के लिए खतरा हैं, मैं सुझाव दे सकता हूं, ताकि दंगों के दौरान शांति और व्यवस्था बनी रहे।

माननीय श्री के.एम. मुंशी : आपने दंगों के दौरान गुटों और गिराहों को छोड़ दिया है। धारा के शब्द हैं ‘संप्रदायों के बीच’ गुट और गिरोह।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : हम इसे इस प्रकार रख सकते हैं, ‘संप्रदाय के उन तत्त्वों, गिरोहों और गुटों के बीच होने वाले झगड़ों से शांति और व्यवस्था के लिए उत्पन्न खतरों से निपटने के लिए।’

माननीय श्री के.एम. मुंशीः ‘और उसके आगे उल्लिखित इसके उद्देश्य के लिए।’