11. बंबई पुलिस अधिनियम-संशोधन विधेयक - Page 185

168 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

वर्णित करना नहीं है। अर्थ स्पष्ट है। इसके आगे आने वाले कतिपय अन्य प्रयोजन स्पष्टतः स्वयं विधेयक में प्रतिष्ठापित प्रयोजनों को स्पष्ट करते हैं। कोई अन्य प्रयोजन विधेयक में नहीं लाया जा सकता।

माननीय अध्यक्ष : क्या ‘कतिपय अन्य प्रयोजनों के लिए’ शब्दों को हटा देना चाहिए?

माननीय अली मोहम्मद खान देहलवी : उन्हें जरूर हटाना चाहिए, क्योंकि हम केवल धारा 27 पर विचार कर रहे हैं, न कि समग्र अधिनियम पर।

माननीय श्री बी.जी. खेर : अगर आप ऐसा नहीं चाहते, तो हम भी इसे हटा देना चाहते हैं।

माननीय अध्यक्ष : आम सहमति यही लगती है कि ‘इसके आगे’ शब्दों को रहना चाहिए। तब संशोधन ऐसे पढ़ा जाएगा ‘इसके आगे आने वाले’ शब्दों के स्थान पर निम्नांकित को प्रतिस्थापित करेंः

उन व्यक्तियों से निपटने के लिए जो बंबई नगर के लिए खतरा हैं और संप्रदायों के बीच होने वाले झगड़ों से जनशांति और स्थिरता को भंग न होने देने के लिए।

माननीय श्री बी.जी. खेर : क्या मैं सुझाव दे सकता हूं कि वाक्यांश को ऐसा होना चाहिए, ‘जनशांति या स्थिरता’ न कि जनशांति और स्थिरता? इसी प्रकार यह भी ‘संप्रदाय या पंथों के बीच होने वाले झगड़ों के कारण’।

माननीय अध्यक्ष : विभिन्न संप्रदायों या उनके पंथों, गिरोहों या गुटों के बीच होने वाले झगड़ों के कारण जनशांति और स्थिरता को भंग होने से रोकने और इसके आगे आने वाले परिकल्पित कतिपय अन्य प्रयोजनों के लिए।. . .

माननीय अली मोहम्मद खान देहलवी : ‘या कतिपय अन्य प्रयोजनों के लिए।’ मैं समझता हूं हमारी उस पर सहमति है।

माननीय श्री के.एम. मुंशी : मैं हर बात पर सहमत होऊंगा।

श्री आर.के. खेड़गीकर : क्या हमें शब्द-विन्यास की जांच के लिए एक अवसर नहीं मिलेगा? हमने इसे पूरी तरह नहीं समझा है।

माननीय अध्यक्ष : अब मैं अंतिम प्रारूप पढ़ रहा हूं। अगर मैंने कोई गलती की हो, तो ऐसे में यह शुद्धि के लिए प्रस्तुत है।

श्री एस.वी. पारूलेकर : क्या आप हमें इस पर कोई निर्णय करने से पहले संशोधन के अध्ययन हेतु एक अवसर देंगे? संशोधन बहुत लंबा है और इस समय हम इसके मंतव्यों को नहीं जान पा रहे हैं, इसलिए हमें इसका अध्ययन करने का अवसर दिया जाए। यह बहस के लिए रखा जा सकता है।