बंबई पुलिस अधिनियम-संशोधन विधेयक 169
माननीय अध्यक्ष : जैसा कि मैंने कहा, प्रस्तावना, अंततः उसका जिसका अनुसरण हो रहा हो, सारांश और बहुत सामान्य सारांश प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : यह कार्यपालिका को निर्देश होती है।
माननीय श्री बी.जी. खेर : हम यह सब कुछ स्वीकार करने के लिए तैयार हैं जो आप प्रस्तावित करेंगे।
श्री जमनादास एम. मेहता : ऐसा कुछ भी जो इस बहस को छोटा बनाए, उसका स्वागत होगा। (ठहाका)
माननीय अध्यक्ष : इसलिए ऐसा है कि मैं अंतिम शब्दावली का, जिस पर सहमति हो गई है, सुझाव दे रहा हूं कि मैं एक बार फिर समूचे संशोधन को पढ़ रहा हूं, माननीय सदस्य कृपया इसे धैर्यपूर्वक सुनें —
‘इसके आगे आने वाले’ शब्दों की जगह निम्नांकित को स्थानापन्न कीजिए :
उन व्यक्तियों से निपटने के लिए जो बंबई नगर के लिए खतरा हैं और संप्रदायों या उनके पंथों या गिरोहों या गुटों के बीच होने वाले झगड़ों के कारण जनशांति या स्थिरता को भंग न होने देने के लिए और इसके आगे आने वाले अन्य प्रयोजनों के लिए।
श्री जमनादास एम. मेहता : ‘अन्य’ शब्द वहां जरूर होना चाहिए।
माननीय अध्यक्ष : ‘और अन्य प्रयोजनों के लिए’।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : ‘जैसे कि आप्रवासियों से निपटने के लिए’।
माननीय अध्यक्ष : आखिरकार, वकील जानते हैं कि प्रस्तावना का किस तरह अर्थ लगाना चाहिए और जहां तक धाराओं की रचना का संबंध है, इसका महत्त्व ही क्या है। अगर मुझे ऐसा कहने की इजाजत मिले, तो मैं नहीं मानता कि यह मुद्दा वास्तव में इस प्रकार का है कि उस पर इतनी लंबी बहस की जाए।
श्री जमनादास एम. मेहता : ‘अन्य’ शब्द वहां जरूर होना चाहिए क्योंकि पहले जिनकी चर्चा हुई है, वे भी उद्देश्य हैं।
माननीय अध्यक्ष : ‘और आगे आने वाले अन्य प्रयोजनों के लिए’।
श्री जमनादास एम. मेहता : यह ठीक होगा।
माननीय श्री के.एम. मुंशी : मैं संशोधन को स्वीकार करता हूं।
माननीय अध्यक्ष : इसलिए मैं मानता हूं कि शब्दावली यह होगी। (व्यवधान) शब्दावली स्वयं धाराओं से ली जाती है।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : मैं इसे स्वीकार करता हूं।