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बंबई नगरपालिका अधिनियम
संशोधन विधेयक *
डॉ. भीमराव अम्बेडकर (बंबई नगर, भायखला तथा परेल) : महोदय! मैं माननीय सदस्य श्री ए.बी. चित्रे के प्रस्तावित संशोधन का समर्थन करता हूं। महोदय! संशोधन यह है कि कामगारों के प्रतिनिधियों द्वारा चुने जाने वाले चार पार्षदों के अतिरिक्त नगरपालिका कर्मचारियों द्वारा भी दो पार्षद चुने जाने चाहिएं। इस संशोधन का समर्थन क्यों किया जाए, इसका कारण मेरे विचार में इस प्रकार है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि नगरपालिका कर्मचारियों की नगरपालिका प्रशासन में प्रत्यक्ष रुचि होती है। वे म्यूनिसिपल कमिश्नरी के मातहत काम करते हैं। वे नगरपालिका द्वारा नियुक्त विभिन्न अधिकारियों के मातहत काम करते हैं। महोदय! नगरपालिका संशोधन के प्रति आदर भाव रखते हुए मैं यह कहना चाहूंगा कि एक बात स्पष्ट है और पूर्णतया स्पष्ट है, वह यह कि इन नगरपालिका कर्मचारियों को वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जारी किए जाने वाले किसी आदेश के विरुद्ध अपनी शिकायतें दूर करने का कोई अधिकार नहीं है। उनकी स्थिति बंबई सरकार के मातहत कार्य कर रहे आम सिविल कर्मचारी से निश्चित रूप से बहुत ज्यादा भिन्न है। उदाहरणार्थ, प्रांतीय सेवा अथवा अधीनस्थ सेवा में कार्यरत किसी भी सिविल कर्मचारी को हानिकर आदेश के बारे में अपील करने का अधिकार है। बंबई नगरपालिका में ऐसा कोई उपबंध नहीं है। किसी भी अधिकारी द्वारा नगरपालिका के किसी कर्मचारी के विरुद्ध कोई आदेश जारी किया जा सकता है और उस कर्मचारी को उस आदेश के खिलाफ अपील करने का कोई अधिकार नहीं होता। इस संशोधन से नगरपालिका कर्मचारियों को यह लाभ होगा कि बंबई नगरपालिका के किसी भी अधिकारी द्वारा जारी किए जाने वाले आदेश के बारे में उनके प्रतिनिधि सदन में बोल सकेंगे और इस संशोधन से निश्चित रूप से उन्हें कुछ न कुछ राहत मिलेगी। वर्तमान संविधान के अंतर्गत उन्हें यह सुविधा प्राप्त नहीं है।
* बोंबे लेजिस्लेटिव काउंसिल डिबेट्स, खंड 23, पृ. 381-82, 28 जुलाई 1928