13
मद्यनिषेध *
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : महोदय! मैं मद्यनिषेध के संबंध में सदन की प्रबल भावनाओं को भली-भांति समझता हूं। ऐसा नहीं है कि मैं उनसे सहमत नहीं हूं, परंतु अन्य कारणों की वजह से मैं आबकारी मंत्री के प्रति ज्यादा कठोर नहीं होना चाहता। मैं मानता हूं कि वह अभी इस पद पर नए आए हैं और मैं यह भी मानता हूं कि इस पद पर कार्य करना उतना सरल नहीं है। मैं इस पद की जिम्मेदारी स्वीकार करने का साहस दिखाने पर उन्हें बधाई देता हूं, जिसे इस सदन के एक अन्य माननीय सदस्य ने छोड़ना बेहतर समझा।
मैं इस विषय पर बोलने के लिए केवल इस कारण से खड़ा हुआ हूं कि गत दो-तीन दिनों के दौरान माननीय आबकारी मंत्री ने जो कहा है, उसका मुझ पर यह प्रभाव हुआ है कि मैं यह सोचता हूं कि वह उन्हीं पुराने गलत तरीकों को अपनाने लगेंगे, जो आबकारी विभाग में चलते आ रहे हैं। मेरे विचार से कल उन्होंने, हमारे प्रश्नों के दौरान निजाम के राज्य की सीमाओं के पास एक दुकान खोल दी है, क्योंकि निजाम ने भी हमारे क्षेत्र में एक दुकान खोली है। महोदय, मैं यह नहीं सोचता कि एक मंत्री, जिसने मद्यनिषेध की नीति को स्वीकार किया है, वह इस सदन के समक्ष ऐसा बयान या तर्क दे। उनका यह तर्क कुछ इस प्रकार का है कि, क्योंकि किसी डाकू ने डाका डाला है और वह कुछ लूटकर ले गया है, जिसे माननीय आबकारी मंत्री स्वयं कर सकते थे और इसीलिए उन्हें भी डकैती डालने का अधिकार प्राप्त हो गया है। महोदय, किसी एक व्यक्ति के गलती करने से दूसरे व्यक्ति को उसी प्रकार की गलती करने का अधिकार प्राप्त नहीं होता। बेहतर यह रहता है कि मेरे माननीय मित्र आबकारी मंत्री महामहिम निजाम के समक्ष हमारे क्षेत्र में दुकान खोलने के विरुद्ध अपना विरोध प्रस्तुत करते। ऐसा करने के बजाए उन्होंने इस प्रेसिडेंसी के लोगों के व्यापक हितों के स्थान पर कुछ आय प्राप्ति के साधनों में वृद्धि करने को ज्यादा महत्त्व दिया है।
मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि मेरे माननीय मित्र आबकारी मंत्री अन्य सभी बातों