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मद्यनिषेध 173

के बजाए मात्र पैसा अर्जित करने पर ज्यादा ध्यान देते हैं। बजट पर हुई चर्चा के दौरान भी उन्होंने एक ऐसा बयान दिया है, जिस पर मेरे विचार में गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। मेरी आलोचनाओं के जवाब में उन्होंने कहा है कि आबकारी विभाग की नीति पर राय देते समय हमें राज्य के लोगों द्वारा उपयोग में लाई जा रही शराब की खपत की मात्रा को ध्यान में रखना चाहिए, न कि आबकारी विभाग द्वारा अर्जित की जा रही राशि को। उन्होंने सदन में ऐसे आंकड़े प्रस्तुत किए, जिनसे यह पता चलता है कि बंबई के निवासी भारत के अन्य राज्यों के लोगों की तुलना में कम मात्रा में शराब का सेवन करते हैं। मैं समय के अभाव के कारण उन आंकड़ों का अध्ययन नहीं कर पाया हूं। लेकिन मैं समझता हूं कि हमें उन आंकड़ों को मान लेना चाहिए, क्योंकि वे आंकड़े माननीय आबकारी मंत्री ने प्रस्तुत किए हैं। महोदय! लेकिन मैं सोचता हूं कि मेरे माननीय मित्र इस बात को स्वीकार करेंगे कि जहां इस राज्य के लोग वैध रूप से तैयार की गई शराब तो कम प्रयोग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य में अवैध शराब ज्यादा मात्रा में बनाई जा रही है। इस प्रकार यदि हम इस तथ्य को मद्देनजर रखें कि यद्यपि वैध शराब का प्रयोग कम हो रहा है, लेकिन अवैध शराब का प्रयोग बढ़ रहा है, तो परिणाम यह नजर आता है कि शराब की खपत कम नहीं हुई है। यह ठीक है कि हमारे पास अवैध शराब के निर्माण से संबंधित वास्तविक आंकड़े नहीं हैं, लेकिन मेरा विश्वास है कि इस तथ्य को स्वीकार किया जा चुका है। और मैं सोचता हूं कि माननीय आबकारी मंत्री सर्वप्रथम इस तथ्य को स्वीकार करेंगे कि अवैध शराब की खपत बढ़ रही है। इस प्रकार कुल मिलाकर हम लाभ की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि इसका केवल यह परिणाम सामने आ रहा है कि लोग वैध शराब का कम इस्तेमाल कर रहे हैं और अवैध शराब का अधिक। अब प्रश्न यह उठता है कि इस राज्य में अवैध शराब निर्माण में वृद्धि क्यों हो रही है, जहां तक मैं जानता हूं, सरकारी तौर पर इस प्रश्न को कोई जवाब नहीं दिया गया। लेकिन मेरे पास इसका उत्तर है। महोदय! मेरे विचार में इस राज्य में अवैध शराब के बनाने में हो रही बढ़ोतरी का कारण केवल यह है कि देशी शराब पर बहुत ज्यादा शुल्क लगाया गया है। अब राजनीति शास्त्र का एक मान्य सिद्धांत है वह एक ऐसा सिद्धांत है, जो केवल पुस्तकों में नहीं दिया गया है, बल्कि व्यवहार में भी आता है और जिसे प्रत्येक गृहणी भी जानती है, वह यह है कि जब किसी वस्तु की कीमतों में वृद्धि होती है, तब यह आम प्रवृत्ति होती है कि लोग उसके स्थान पर किसी ऐसी दूसरी वस्तु का उपयोग करने लगते हैं, जो उतनी ही उपयोगी हो, परंतु सस्ती हो। हम सभी जानते हैं, उदाहरण के तौर पर जब चीनी के दाम बढ़ते हैं तो लोग चीनी के साथ गुड़ का प्रयोग करने लगते हैं। यदि कॉफी के मूल्य में वृद्धि होगी, तो उस समय लोग चाय का अधिक प्रयोग करने लगेंगे। महोदय! इसी सिद्धांत को इस मामले में लागू करते हुए मैं यह कहना चाहता हूं