174 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
कि देशी शराब पर अधिक शुल्क लगाए जाने के कारण ही अवैध शराब के उपयोग में वृद्धि हो रही है। अतः मेरे माननीय मित्र आबकारी मंत्री इस प्रश्न के इस पहलू पर अधिक ध्यान दें। यदि वह वास्तव में मद्यनिषेध की नीति में विश्वास रखते हैं, तो उन्हें अपनी शुल्क दरों पर पुनः विचार करना होगा। यदि वह शुल्क दर पर पुनः विचार नहीं करते हैं, तो मैं यह कहना चाहूंगा कि वह वैध शराब के उपयोग को नियंत्रित करने में तो सफल हो जाएंगे, लेकिन ऐसा करके वह अवैध शराब के उपयोग को सीधे बढ़ा देंगे।
मैं एक अन्य मुद्दे पर भी अपने विचार प्रस्तुत करना चाहता हूं। वह है, मद्यनिषेध नीति। मेरे माननीय मित्र श्री मर्जबान द्वारा दिए गए तर्कों के उत्तर में माननीय मित्र सदन के नेता से यह सुनकर मुझे प्रसन्नता हुई थी कि मद्यनिषेध सरकार की मान्य नीति है, और सरकार विधान परिषद द्वारा पारित संकल्प की नीति से किसी भी दशा में पीछे नहीं हटेगी। लेकिन मुझे उस समय कुछ निराशा हुई, जब मैंने अनुभव किया कि उन्होंने विषयांतर करना चाहा। उन्होंने हमें बताया कि सदन के समक्ष प्रश्न यह है कि मद्यनिषेध लागू करने के लिए हमें राशनिंग का तरीका अपनाना चाहिए अथवा हमें स्थानीय विकल्प का तरीका अपनाना चाहिए। महोदय! मेरे विचार में कुछ छोटी बातों को छोड़कर ये दोनों पद्धतियां कमोबेश समान रूप से प्रभावी हैं। आप चाहे राशन की नीति अपनाएं अथवा स्थानीय विकल्प की नीति अपनाएं, इससे विद्यमान स्थिति पर कोई अंतर नहीं पड़ेगा, क्योंकि दोनों से ही बाजार में उपलब्ध शराब की मात्रा ही नियंत्रित होगी। आप चाहे दुकानदारों को कम माल की आपूर्ति करें अथवा दुकानें न खोलने की नीति अपनाएं, परिणाम समान होगा। महोदय! लेकिन प्रश्न यह है कि मद्यनिषेध की नीति को किस सीमा तक लागू किया जा सकता है, और मैं समझता हूं कि मेरे माननीय मित्र सदन के नेता ने इस प्रश्न को मद्देनजर नहीं रखा है। महोदय! मेरे विचार से आप मद्यनिषेध को सफलतापूर्वक लागू कर पाएंगे अथवा नहीं, यह प्रश्न पूर्णतः इस पर निर्भर करता है कि आप इससे जुड़े वित्तीय प्रश्न का किस प्रकार हल ढूंढते हैं और हम अपनी नई आबकारी नीति से होने वाली वित्तीय हानि को पूरा कैसे करते हैं? मैं सोचता हूं कि सदन के इस पक्ष के लोग माननीय सदन के नेता से कराधान के उन तरीकों को जानना पसंद करेंगे, जिन पर वह विचार कर रहे हैं। महोदय! मैं सोचता हूं कि यद्यपि सदन में इस विषय पर मतभ्ेद हो सकते हैं, लेकिन कम से कम इस पक्ष के लोग यह महसूस करते हैं कि हम अतिरिक्त कर लगाने का विरोध नहीं करेंगे, बशर्ते कि सरकार इन करों का उपयोग राष्ट्र-निर्माण के कार्यों में करने का प्रयास करे। हम निश्चित रूप से अतिरिक्त करों का विरोध करेंगे, यदि सरकार इन करों का उपयोग सरकार के कामकाज को चलाने या मात्र प्रशासनिक कार्यों में करे। यदि वह मात्र जीवन गुजारने की जगह जीवन को खुशहाल बनाने के लिए करों का उपयोग करेगी, तो उस दशा में इस पक्ष के