14. प्रसूति लाभ विधेयक - Page 193

14

प्रसूति लाभ विधेयक *

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : महोदय! मैं इस विधेयक के प्रथम वाचन के समर्थन में बोल रहा हूं। ऐसा करते समय मैं इस विधेयक के विरुद्ध चर्चा के दौरान उठाए गए मुद्दों का उत्तर देना चाहता हूं। इस विधेयक के विरुद्ध माननीय सामान्य (जनरल) सदस्य ने सर्वप्रथम यह कहा है कि यह कोई दुर्घटना नहीं — ऐसी दुर्घटना — जिसका आशय हम कामगार क्षतिपूर्ति अधिनियम से लेते हैं। अतएव, कामगार क्षतिपूर्ति अधिनियम का सिद्धांत उन महिलाओं पर लागू नहीं किया जा सकता, जो इस विधेयक के अंतर्गत लाभान्वित होंगी। महोदय! मैं मानता हूं कि यह कोई दुर्घटना नहीं है। लेकिन इसका यह आशय नहीं है कि महिलाएं उन लाभों की हकदार नहीं हैं, जिन्हें इस प्रस्तावित विधेयक के माध्यम से उन्हें प्रदान किया जाएगा। यह विधेयक जिस सिद्धांत पर आधारित है, वह एकतरफा है। मुझे विश्वास है कि सभी सदस्य इस बात से पूर्णतया सहमत होंगे कि मां के लिए प्रसव-पूर्व दशाएं तथा प्रसव के पश्चात् बच्चों के लालन-पालन की समस्या विधेयक का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। मैं नहीं समझता कि कोई भी इस सिद्धांत के विरुद्ध होगा। महोदय! अतएव, मेरा यह विश्वास है कि यह राष्ट्रीय हित में होगा कि जच्चा को कुछ समय के लिए प्रसव के पूर्व और कुछ समय के लिए प्रसव के पश्चात् विश्राम दिया जाए। विधेयक के सिद्धांत पूर्णतया इस तथ्य पर आधारित हैं।

महोदय! इसलिए मैं यह स्वीकार करता हूं कि इसकी अधिकांश जिम्मेदारी सरकार को ही निभानी होगी। मैं इस सच्चाई को स्वीकार इसलिए करने के लिए तैयार हूं, क्योंकि सामान्य जनता के कल्याण की चिंता करना बुनियादी तौर से सरकार की जिम्मेदारी है। प्रत्येक देश में जहां प्रसूति लाभ दिए जाते हैं, वहां प्रसूति लाभ के लिए सरकार कुछ राशि व्यय करती है। महोदय! लेकिन ऐसा होते हुए भी मैं यह स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हूं कि किसी महिला का कोई नियोक्ता प्रसूति की अवस्था में महिला के हितों की रक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त होता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इसका कारण यह है कि नियोक्ता महिला को किसी