180 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
अवैध हो, लेकिन यह भी हो सकता है कि ये समझते हों कि वह संपत्ति उनकी है। महोदय! इस सदन को यह निश्चित रूप से जानकारी होनी चाहिए कि दंगे अवैध रूप से एकत्र हुई भीड़ के कारण होते हैं। अवैध रूप से एकत्र हुई भीड़ उस वक्त दंगों का रूप ले लेती है, जब वह भीड़ ताकत का इस्तेमाल करने लगती है। धारा 146 में दंगों की यही परिभाषा दी गई है। ऐसे एकत्र होना संभवतः कोई अपराध न हो, जिसे नजरअंदाज किया जा सकता है। निश्चित रूप से यह कोई ऐसा अपराध नहीं है, जिसके लिए कोड़े लगाने जैसी भयानक सजा दी जाए। फलतः मेरा विचार यह है कि यदि हम कोड़े लगाने की सजा लागू करना चाहते हैं, तो हमें खंड 2 को इस प्रकार संशोधित करना होगा कि यह केवल उन दंगों पर लागू हो, जो सांप्रदायिक विवाद की वजह से हों, न कि अन्य प्रकार के दंगों पर। मेरे विचार में इस खंड की शब्दावली इतनी व्यापक है, जिसकी परिधि में लगभग प्रत्येक प्रकार के दंगे आ जाते हैं। ऐसे दंगे जो किसी चलती बात के कारण हुए हों और ऐसे दंगे जो बहुत मामूली हों, ऐसे दंगे जो सामान्य मानवीय मामलों के कारण उत्पन्न हों। हम नहीं चाहते हैं कि यह सजा ऐसे मामलों पर भी लागू हो। भारतीय दंड संहिता में बड़ी बुद्धिमानी पूर्वक साधारण दंगों के अपराधों के लिए साधारण सजाओं का प्रावधान किया गया है। यदि यह विधेयक पास करना अनिवार्य है, तो यह अनिवार्यता केवल सांप्रदायिक दंगों से निपटने जैसे विशेष उद्देश्य के लिए हो सकती है और किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं। यदि मेरे माननीय मित्र गृह मंत्री खंड 2 के शब्दों को इस ढंग से परिवर्तित करने के लिए तैयार हैं कि वह केवल सांप्रदायिक दंगों से संबंधित अपराधों से निपटने के लिए ही लागू हो, तो मैं उनका समर्थन करूंगा। इस अवसर पर मुझे केवल यही कहना है।