16. मंत्रियों के वेतन विधेयक - Page 198

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मंध्यिं के वेतन विधेयक *

डॉ. भीमराव अम्बेडकर (बंबई नगर, भायखला तथा परेल) : अध्यक्ष महोदय! मैं एक वक्तव्य देना चाहता हूं। मैंने वक्तव्य शब्द का प्रयोग जानबूझकर किया है। मैं अपने माननीय मित्र प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तावित विधेयक पर कोई संशोधन प्रस्तुत नहीं कर रहा हूं और न ही मैं इस विषय पर मत विभाजन के लिए कहना चाहता हूं। मंत्रियों के वेतन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित होना चाहिए था, जैसा कि मंत्रिमंडल ने तय किया है, पार्टी के वोटों के आधार पर इसे पारित नहीं किया जाना चाहिए। मंत्रिमंडल ने चूंकि इस तरीके को नहीं अपनाया, इसलिए मुझे इस विधेयक के सिद्धांत का विरोध करने के लिए विवश होना पड़ा है। प्रधानमंत्री महोदय ने इस विधेयक को प्रस्तुत करते हुए जो भी कहा है, इसमें कोई संदेह नहीं है कि उन्होंने जिस गंभीरता से अपनी बात कही है तथा मंत्रियों के आचरण संबंधी उन्होंने जिन सिद्धांतों का प्रतिपादन किया है, उससे उनके प्रति इस सदन के प्रत्येक सदस्य का सम्मान पहले से बढ़ गया है। परंतु एक व्यावहारिक व्यक्ति के नाते स्थिति का अवलोकन करते हुए तथा तमाम बातों पर व्यावहारिक दृष्टि से नजर डालते हुए, मैं इस विधेयक में मंत्रियों के मानक वेतन को स्वीकार करने में असमर्थ हूं।

महोदय! मंत्रियों के लिए यह मानक वेतन क्यों नहीं होना चाहिए, उन कारणों का उल्लेख करने से पहले मैं सदन के समक्ष भारत के बाहर तथा भारत में ही मंत्रियों को दिए जाने वाले वेतनों से संबद्ध कुछ आंकड़े प्रस्तुत करना चाहता हूं, ताकि सदन शुरू में ही यह जान सके कि हम वर्तमान में विद्यमान मानकों से कितनी दूर तक जा रहे हैं। मेरे पास कुछ आंकड़े हैं, जिन्हें मैंने एकत्र किया है। आइरिश फ्री स्टेट में 11 मंत्री हैं। प्रत्येक को 1,700 पौंड वार्षिक वेतन दिया जाता है। मेरे हिसाब से यह लगभग 2,000 रुपए मासिक के बराबर है। दक्षिणी अफ्रीका में 13 मंत्री हैं, 2 बिना विभाग के। प्रधानमंत्री को 3,500 पौंड वार्षिक वेतन दिया जाता है तथा अन्य मंत्रियों को 2,500 पौंड वार्षिक। मेरे हिसाब से यह लगभग 2,900 रुपए मासिक के बराबर है। मैं ऑस्ट्रेलिया के आंकड़े प्राप्त नहीं कर सका, परंतु कनाडा के आंकड़े इस प्रकार हैं : प्रधानमंत्री को 19,000 डॉलर वार्षिक वेतन दिया जाता