16. मंत्रियों के वेतन विधेयक - Page 199

182 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

है। वहां 16 मंत्री हैं, जिन्हें 14,000 डॉलर वार्षिक वेतन का भुगतान किया जाता है, जिसमें 4,000 डॉलर अधिवेशन के दिनों में भत्ते के होते हैं। न्यूजीलैंड में 12 मंत्री हैं। वहां प्रधानमंत्री को आवास सहित 1,800 पौंड वार्षिक वेतन दिया जाता है तथा मंत्री को 1,370 पौंड वार्षिक वेतन दिया जाता है, जिसमें 200 पौंड मकान भत्ता शामिल है। इस प्रकार मंत्री को 1,500 रुपए मासिक वेतन मिलता है।

जहां तक भारत का संबंध है, नया भारत सरकार अधिनियम लागू होने से पूर्व दिए जा रहे वेतन को कुछ समय के लिए भुला भी दिया जाए तथा अंतरिम मंत्रियों के लिए निर्धारित किए गए वेतनों पर विचार करते हुए कोई भी व्यक्ति यह नहीं कह सकता है कि अंतरिम मंत्री, मंत्री नहीं थे। मैं संसद के समक्ष प्रस्तुत की गई तालिकाओं के आंकड़े प्रस्तुत करना चाहता हूं। मद्रास में प्रधानमंत्री को 3,000 रुपए तथा प्रत्येक मंत्री को 2,500 रुपए मासिक वेतन तथा आवास दिया जाता था। बंबई में प्रधानमंत्री का वेतन 4,000 रुपए तथा मंत्रियों का वेतन 3,500 रुपए मासिक था। संयुक्त प्रांत में प्रधानमंत्री सहित मंत्री को 2,500 रुपए मासिक वेतन दिया जाता था। मध्य प्रांत में प्रधानमंत्री को 3,000 रुपए तथा प्रत्येक मंत्री को 2,250 रुपए, बिहार में प्रधानमंत्री को 2,500 रुपए तथा प्रत्येक मंत्री को 2,000 रुपए और उड़ीसा में मंत्रियों को 1,000 रुपए मासिक वेतन दिया जाता था।

महोदय! अब इन आंकड़ों की तुलना मंत्रियों के वेतन विधेयक में प्रस्तावित आंकड़ों से कीजिए। इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह विद्यमान मानकों से बहुत भिन्न है। मुझे लगता है कि यह अंतर केवल मात्रा का अंतर नहीं है, बल्कि दूसरी प्रकृति का अंतर है। मेरे विचार से यह सिद्धांतों का अंतर है। एक मंत्री का वेतन किन सिद्धांतों के आधार पर निर्धारित किया जाना चाहिए। महोदय! मेरे विचार में चार सिद्धांत होने चाहिए। पहला है, मंत्रियों का सामाजिक स्तर। निस्संदेह मंत्री समुदाय के सामाजिक नेता होते हैं। दूसरा क्षमता का सिद्धांत, तीसरा लोकतंत्र का सिद्धांत तथा चौथा, सत्यनिष्ठा तथा प्रशासन की स्वच्छता का सिद्धांत। मैं पहले सिद्धांत पर अनावश्यक सीमा तक जोर देना नहीं चाहता। व्यक्तिगत तौर पर मुझे स्वयं सोचना चाहिए कि देश के मंत्रियों को, जो देश के प्रथम नागरिक हैं, सुसंस्कृत जीवन-यापन करना चाहिए, जिन्हें कला का सम्मान करना चाहिए, जिन्हें विद्वता का सम्मान करना चाहिए और जिन्हें अन्य लोगों के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए। लेकिन यदि मेरे मित्र इस मामले के इस पहलू पर विचार नहीं करना चाहते, तो मैं इसे छोड़ने के लिए तैयार हूं। लेकिन मंत्रियों का वेतन निर्धारित करते समय क्षमता, प्रजातंत्र तथा सत्यनिष्ठा के सिद्धांत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मैं नहीं जानता कि प्रधानमंत्री मंत्रियों के कर्तव्यों एवं कार्यों के विषय में क्या सोचते हैं। यदि उनका विचार है कि मंत्रियों को झंडे फहराने तथा लाल वर्दी वाली महिलाओं से सलामी

* बोंबे लेजिस्लेटिव असेम्बली डिबेट्स, खंड 1, पृ. 247-54, 23 अगस्त 1937