16. मंत्रियों के वेतन विधेयक - Page 200

मंत्रियों के वेतन विधेयक

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लेने के अलावा अन्य कोई काम नहीं करना है, तो दूसरी बात है। मेरे विचार में, और जिस पर मैं अपनी पूरी क्षमता से जोर देना चाहता हूं कि यदि हम मंत्रियों से कोई अपेक्षा रखते हैं, तो वह है क्षमता। मेरे विचार में इस संबंध में कोई संदेह नहीं है कि राज्य के तीन स्तंभ हैं — विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका। कार्यपालिका इनमें प्रमुख है और इसे ही देश की समस्याओं का पता लगाना है तथा उनको दूर करने के उपाय सुझाने हैं।

महोदय! संक्षेप में, यदि हम अपने सामने उपस्थित समस्याओं का हल खोजना चाहते हैं तथा संविधान का सर्वोत्तम लाभ देना चाहते हैं, तो कार्यपालिका को बुद्धि मत्ता का परिचय देना होगा।

मेरे सामने यह प्रश्न है कि क्या प्रस्तावित वेतन ऐसे व्यक्तियों को आमंत्रण देने में सक्षम है, जो व्यक्ति समस्याओं का सामना करने और सुलझाने की क्षमता रखते हैं। देश की वर्तमान परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए, महोदय! मैं इसका सकारात्मक उत्तर नहीं दे सकता। सर्वप्रथम हमें इस तथ्य की ओर भी ध्यान देना होगा कि हमारे पास अन्य बहुत से ऐसे व्यवसाय हैं, जिनमें मंत्रियों को दिए जाने वाले वेतन से अधिक धन लाया जा सकता है। बहुत से व्यक्ति जो क्षमतावान हैं और जो महत्वाकांक्षी हैं, वे मंत्री बनकर मंत्रालय का उत्तरदायित्व निभाने के बजाए, किसी अन्य व्यवसाय को अपनाना अधिक पसंद करेंगे। यदि मंत्रिमंडल इस आशय का प्रावधान करता कि किसी भी व्यवसाय से संबंधित कोई भी व्यक्ति 500 रुपए से अधिक वेतन नहीं प्राप्त करेगा, तो बात मेरी समझ में आती। यदि उन्होंने ऐसा किया होता, तो दूसरी बात होती। परंतु वह ऐसा नहीं कर रहे हैं। वह सक्षम व्यक्तियों को अन्य व्यवसायों की ओर धकेल रहे हैं। यह इस मामले का एक पहलू है। दूसरा विचारणीय पहलू यह है कि भारत की वर्तमान परिस्थितियों पर विचार करते हुए मुझे यह कहना पड़ता है कि इन जिम्मेदारियों का निर्वाह करने में सक्षम बुद्धिजीवी वर्ग की संख्या बहुत ही कम है। महोदय! इस देश में विद्यमान सामाजिक व्यवस्था के कारण, जिसे ब्रिटिश शासन भी समाप्त नहीं कर पाया है, शिक्षा एक छोटे से वर्ग तक ही सीमित थी। अधिकांश लोगों को कभी भी शिक्षा का अधिकार एवं अवसर प्राप्त नहीं हुआ। वास्तव में, चातुर्वर्ण्य व्यवस्था में केवल एक वर्ग ही शिक्षा प्राप्त कर सकता था, अन्य इससे वंचित रहे। परिणामस्वरूप अधिकांश जनता की यह स्थिति नहीं है कि वह ऐसे नेता सामने ला सके, जिन्हें प्रशासन चलाने हेतु मंत्रिमंडल में लिया जा सके। अतएव, मेरा कहना यह है कि इस वेतन के आधार पर सक्षम व्यक्तियों को प्रशासन की जिम्मेदारी निबाहने के लिए आमंत्रित नहीं किया जा सकता।

महोदय! अब मैं प्रजातंत्र के प्रश्न पर आता हूं। वेतन का क्या प्रभाव होगा? मैं मामले को घुमा-फिराकर न कहकर सीधा ही यह कहना चाहता हूं कि इस वेतन का परिणाम यह होगा कि राजनीतिक शक्ति को अपने वर्ग अथवा अपने समुदाय की भलाई के लिए इस्तेमाल करने के इच्छुक ऐसे लोग जो पैसे की चिंता नहीं करते हैं