16. मंत्रियों के वेतन विधेयक - Page 202

मंत्रियों के वेतन विधेयक

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सुरक्षित वेतन है या नहीं। अनिवार्यतः न्यूनतम स्तर सुरक्षित स्तर नहीं हो सकता। मुझे विश्वास है कि मेरे प्रतिरक्षी मित्र ठेके देते समय वह धारा शामिल करते हैं कि ठेका केवल इसीलिए नहीं दिया जाएगा कि उसकी दरें न्यूनतम हैं। जैसे कि हम न्यूनतम मानक वाले व्यक्ति को मात्र न्यूनतम दरों के कारण ठेका नहीं देते हैं, उसी प्रकार हम कुछ व्यक्तियों को केवल इस आधार पर मंत्री के रूप में काम करने नहीं देंगे, क्योंकि वे न्यूनतम वेतन स्वीकार कर रहे हैं। हमें समस्या के दूसरे पहलू पर भी विचार करना होगा कि क्या वह ठेकेदार जो न्यूनतम भाव दरें दे रहा है, अपना कार्य पूरा कर भी सकता है या नहीं। यद्यपि महोदय कह सकते हैं कि 500 रुपए का वेतन पर्याप्त है, परंतु मेरा सुझाव है कि इससे बात समाप्त नहीं हो जाती है। इस सदन को विचार करना होगा कि क्या इस आधार पर वह यह आशा कर सकता है कि प्रशासन संभावित भ्रष्टाचार से मुक्त होगा।

महोदय! अब मैं इस विषय पर 1920 में हाऊस ऑफ कॉमन्स द्वारा गठित समिति द्वारा दी गई एक रिपोर्ट का छोटा सा उद्धरण सदन में प्रस्तुत करना चाहूंगा। यह समिति ऐसे सिद्धांत तय करने के लिए बनाई गई थी कि मंत्रियों के वेतन कैसे तय किए जाएं। समिति की राय थी कि :

किसी सरकारी पद के लिए कितना उपयुक्त वेतन निर्धारित किया जाए, इस

जैसे विषय कम ही हैं, जिन पर इतने अधिक मत प्रकट किए गए हों। इतने

अस्पष्ट और अनिश्चित विषय पर समिति कोई ऐसा दावा नहीं करती कि वह

कोई बिल्कुल ठीक विचार प्रस्तुत कर सकेगी, तथापि यह समिति उन सामान्य

सिद्धांतों के बारे मेंं प्रारंभिक टिप्पणी करना चाहती है, जिन्हें इन कठिन कर्तव्य

को पूरा करते समय अपने ध्यान में रखती है। इस सिद्धांत को पूर्णतया अस्वीकार

करना असंभव है कि लोगों को यह अधिकार है कि वे कम से कम खर्च से

कुशल सुविधाएं चाहते हैं। चाहे वे सरकारी कर्मचारी संसद में बैठें या न बैठें,

सिद्धांत तो वही एक ही है। कोई भी कर लगाने का एकमात्र औचित्य यही है

कि या तो वह आवश्यक है अथवा जनता के लिए उसकी उपयोगिता है। यदि

इस सदन की विभिन्न समितियों द्वारा बार-बार ली गई सिफारिशों के बावजूद

कुछ ऐसे बेकार के पद हैं, जिनके पास कोई काम नहीं है, तो उन्हें तुरंत समाप्त

कर दिया जाना चाहिए, और जैसा कि आप इस रिपोर्ट में देखेंगे, समिति ने

अपने काम में कोई चूक नहीं की और ऐसे कई पद गिनाए हैं।

यदि कुछ पदों पर जरूरत से ज्यादा वेतन दिया जा रहा है, तो उसे सुधारने

की जरूरत है। यदि जनता के हित में कुछ पदों को दूसरे पदों से मिलाया जा

सकता है, तो इस उपाय की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। साक्ष्य में कई ऐसे

सुझाव दिए गए, जिन्हें अपनाना समिति के अधिकार-क्षेत्र में नहीं है। संक्षेप में

सभी सरकारी विभागों को इस प्रकार मितव्ययिता से काम चलाना चाहिए, जैसे

एक व्यक्ति अपनी घरेलू व्यवस्था चलाते समय करेगा।