16. मंत्रियों के वेतन विधेयक - Page 204

मंत्रियों के वेतन विधेयक

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अनुसार यूनाईटेड किंगडम में प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 50 पौंड, संयुक्त राज्य अमरीका में 100 पौंड, फ्रांस में 40 पौंड, ऑस्ट्रेलिया में 70 पौंड, कनाडा में 75 पौंड, भारत में 4 पौंड है। (माननीय श्री बी.जी. खेर : सुनिए, सुनिए।) महोदय! यदि यह सब इस सिद्धांत के आधार पर किया गया है कि वेतन लोगों की आय के अनुसार होना चाहिए, तब मैं नहीं समझ सकता कि यह किस प्रकार कहा जा सकता है कि 500 रुपए प्रति मास का वेतन 4 पौंड वार्षिक आय कमाने वाली इस देश की जनता की आय के अनुरूप है। निश्चित रूप से, यदि मेरे मित्र इस सिद्धांत के आधार पर इस विधेयक को प्रस्तुत कर रहे हैं कि वेतन लोगों की आय के अनुरूप होना चाहिए, तो मेरे विचार से मंत्री के लिए 500 रुपए का वेतन बहुत अधिक है। यह 100 रुपए से कम होना चाहिए, इसे 75 रुपए होना चाहिए। ऐसा सुझाव भी दिया गया था। यदि वे ईमानदार हैं, वे इस राशि को न्यायिक रूप से निर्धारित करना चाहते हैं, न कि लोगों को खुश करने के लिए तब उन्हें अपनी ईमानदारी को तर्कसंगत क्यों नहीं बनाना चाहिए। वह राशि क्यों निश्चित की जाए, जो लोगों की आय के सभी अनुपातों से बहुत दूर है।

कम वेतन निर्धारित करने के लिए दूसरा औचित्य यह दिया गया है कि मंत्रियों को आम लोगों जैसा नजर आना चाहिए। उन्हें आम आदमी की तरह जीवन-यापन करना चाहिए। मंत्री और आम आदमी में कोई भिन्नता नहीं होनी चाहिए। महोदय! यदि मंत्री परिषद का यह उद्देश्य है कि सभी अंतर समाप्त होने चाहिए, वे सामान्य लोगों की तरह नजर आने चाहिए; लोगों को उनमें विश्वास होना चाहिए कि वे उन्हीं जैसे हैं, तब, महोदय! मेरा कहना है कि उनमें विश्वास जीतने का यह तरीका नहीं है। महोदय! इस देश में विश्व के किसी भी दूसरे देश से कहीं ज्यादा सामाजिक और धार्मिक भेदभाव विद्यमान हैं। इस प्रेसिडेंसी में, ब्राह्मण और गैर-ब्राह्मण, सवर्ण और अछूत का भेदभाव है। मैं केवल हिन्दुओं की बात कर रहा हूं — यहां मराठा बनाम गुजराती, गुजराती बनाम कन्नड़ का भेदभाव है। और इस सबसे बढ़कर हिन्दू और मुस्लिमों के बीच भेदभाव हैं। यदि आप प्रशासन में लोगों का विश्वास जगाना चाहते हैं, तो मेरे अनुसार यह उचित नहीं है कि मंत्री गलियों में अधूरे कपड़े पहन कर जाएं और अपना शरीर प्रदर्शन करें; सिगरेट के स्थान पर बीड़ी पीएं, अथवा तृतीय श्रेणी या बैलगाड़ी में यात्राएं करें। इन बातों से किसी को भी धोखा नहीं दिया जा सकता। यदि आप लोगों का विश्वास जीतना चाहते हैं, तो मेरे विचार में इसका एक ही रास्ता है। अपनी सरकार, अपनी मंत्री परिषद, अपनी सिविल सेवाओं को ऐसा बनाए कि वे किसी एक वर्ग विशेष अथवा समुदाय के एकाधिकार में ही न रहें (हर्षध्वनि)। हम देखेंगे कि मंत्री परिषद इस संबंध में क्या करने जा रही है। लेकिन यदि वे यह ढोंग करना चाहते हैं कि ऐसा करके जनता में विश्वास पैदा करने जा रहे हैं, तो इसे मैं बचकाना कहूंगा और यह कहूंगा कि यह सब प्रयास निश्चय ही असफलता की ओर ले जाएंगे।