17. अपराधी परिवीक्षा विधेयक - Page 209

192 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

है। खंड 6 के अंतिम भाग में कहा गया है :

अगर अपराधी की उम्र सोलह वर्ष से कम है और अदालत को यह लगे कि अपराध करने में अपराधी के माता या पिता या अभिभावक उसकी उपेक्षा करके या किसी अन्य ढंग से अपराध करने में सहायक बने हैं, तो अदालत इसकी क्षतिपूर्ति या हर्जाने तथा मूल्य की अदायगी करने के लिए माता या पिता या अभिभावक को आदेश दे सकती है।

मुझे लगता है कि माता-पिता या अभिभावक को आसानी से उत्पीडि़त किया जा सकता है। मेरे विद्वान मित्र माननीय गृह मंत्री यह मानेंगे कि ‘उपेक्षा’ और ‘लापरवाही’ जैसे शब्द पूर्णतया अस्पष्ट हैं, और लापरवाही क्या है और क्या नहीं है, इसकी कोई निश्चित परिभाषा देना बहुत ही मुश्किल है। अगर मैं इस बात का उल्लेख करूं कि सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान क्या हुआ, मुझे लगता है कि यह एक ऐसा उदाहरण हो सकता है, जिसके द्वारा मेरे माननीय मित्र के लिए मेरी कठिनाई को समझना संभव होगा। मुझे विश्वास है कि यह सत्य है — अगर बताया जाए कि मैं गलत हूं तो मैं अपनी गलती सुधार लूंगा — कि सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान कई सरकारी नौकर, जो राज्य की नौकरी में थे और जिनके बच्चों ने सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया था, उन पर इस आधार पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की गई थी कि बच्चे आंदोलन में भाग न ले सकें। यह निगरानी न रखकर उन्होंने राज्य के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया है, क्योंकि आंदोलन तत्कालीन सरकार के प्रति विद्रोह था। मुझे लगता है कि मेरा यह कहना सही है कि वे सदस्य, जो अब विपक्ष में बैठे हैं, उन्होंने उस सिद्धांत पर गहरी आपत्ति उठाई थी, क्योंकि अगर मैंने उन्हें ठीक तरह से समझा है, तो उनका दावा यह था कि कोई भी माता-पिता अपने बच्चों के आचरण के प्रति उत्तरदायी नहीं होते हैं, विशेषकर जबकि उनका आचरण किसी निश्चित विचार से संबंधित हो, जो कि उनके अभिभावकों के विचार से बहुत तर्कसंगत ढंग से भिन्न हो। मेरा यह निवेदन है कि आमतौर पर जैसे कि अभिभावक सावधान व कर्तव्यनिष्ठ होते हैं, उसके बावजूद बच्चों में आपराधिक प्रवृत्ति विकसित हो सकती है और जब तक ‘अवहेलना’ या ‘गुप्त सहयोग’ या ‘प्रेरक’ शब्द को उचित रूप से परिभाषित नहीं किया जाता, मुझे लगता है, जैसा कि शायद माननीय गृह मंत्री इसके परिणामों के बारे में जानते हैं, इस विधेयक के परिणाम उससे भी ज्यादा निकलेंगे।

मेरे माननीय मित्र श्री ब्राम्बले के भाषण से पता चलता है कि उन्होंने निस्संदेह इस समस्या का अध्ययन करने पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने कहा है कि अंग्रेजी विधान में कई विसंगतियां हैं, यह देखने के लिए इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए कि जो विसंगतियां अंग्रेजी विधान में पाई गई हैं, वे इस विधान में प्रस्तावित न हों, जिसे हम पारित कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि उनके पास यह विश्वास करने