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न्यायपालिका की स्वतंध्ता *
डॉ. भीमराव अम्बेडकर (बंबई नगर) : अध्यक्ष महोदय! मैं इस प्रस्ताव का समर्थन करता हूं। अब जबकि बहस बिल्कुल समाप्ति पर है, मैं इस प्रस्ताव पर बोल रहा हूं, और यह समझता हूं कि माननीय गृह मंत्री को जवाब देने के लिए थोड़ा समय मिलना ही चाहिए। इसलिए, जो वक्तव्य मैं इस सदन में देना चाहता हूं, उसे संक्षेप में ही कहूंगा।
महोदय! अपनी ओर से बोलते हुए मैं जो पहली बात कहना चाहता हूं, वह यह है कि अधिनियम, जो इस निंदा प्रस्ताव का आधार है, मेरे लिए आश्चर्य की बात नहीं है। मैं तो इसे कई गतिविधियों की शृंखला की पराकाष्ठा के रूप में देखता हूं, जो निस्संदेह कानून तोड़ने की प्रतिज्ञा के बराबर है, जिसके लिए सरकार तब से दोषी है, जब से उसने कार्यभार संभाला है। यह शृंखला का एक हिस्सा है, चल रहे नाटक का एक अंक है। हमें नहीं पता, कब इसका अंत हो जाए। पहले जिस कारगुजारी का मैं उल्लेख करना चाहता हूं, वह बारडोली के किसानों से जब्त की गई भूमि की वापसी की है। निश्चित रूप से यह वह काम है, जिसकी जिम्मेदारी वर्तमान सरकार पर है (व्यवधान)। मेरी इच्छा है कि मेरी बात सुनी जानी चाहिए, क्योंकि मुझे दिया गया समय सीमित है।
माननीय अध्यक्ष : शांत, शांत। क्या माननीय सदस्य अपना स्थान पुनः ग्रहण करेंगे। मुझे नहीं लगता कि विचार-विमर्श इस आधार पर होना चाहिए। यह तो अंतहीन क्षेत्र में प्रवेश करने जैसा होगा। इस समय मुद्दा यह नहीं है कि सरकार अपने पुराने कार्यों के लिए निंदा की पात्र है या नहीं, बल्कि मुद्दा यह है कि यह विशेष अधिनियम जो वर्तमान प्रस्ताव की विषय-वस्तु है, वह निंदा का पात्र है या नहीं। यह प्रस्ताव, जो एक निश्चित विषय को लेकर है, जनता के लिए तात्कालिक महत्त्व का है। इस निश्चित प्रस्ताव के कारण चर्चा की स्वीकृति दी गई है, और जिसका पालन बहस के दौरान भी करना होगा अन्यथा विचार-विमर्श का उद्देश्य नष्ट हो जाएगा। इसलिए मैं माननीय सदस्य से प्रार्थना करता हूं कि वह सदन के