19. न्यायपालिका की स्वतंत्रता - Page 215

198 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

उसे वापस ले लिया होता, शायद अन्य सदस्यों ने कहा होता कि बहस में भाग नहीं लेना चाहते हैं। लेकिन जैसा कि मैंने कहा है कि अगर बहस अंततः निष्फल सिद्ध हुई तो दोष उनका ही होगा।

समाचार-पत्रों की रिपोर्ट से मिले तथ्यों के आधार पर विचारणीय मुद्दा क्या है? कहा जाता है कि उच्च न्यायालय ने इन व्यक्तियों का आवेदन रद्द कर दिया है। प्रश्न यह है कि मंत्री महोदय ने इसकी अनुमति क्यों दी है? मुझे यह एक सीमित मुद्दा लगता है। वस्तुतः दो अपराधियों को सुनाई गई सजा को निलंबित करने के लिए माननीय गृह मंत्री कह सकते हैं कि उच्च न्यायालय के पास निलंबित करने की शक्ति नहीं है और इसलिए यह आग्रह करना बिल्कुल ही अप्रासंगिक होगा कि क्या उच्च न्यायालय बुद्धिमानी से या अल्प बुद्धि से सजा निलंबित करने से मना कर सकता है। सवाल यह नहीं है। सवाल यह है कि जिन बंदियों को कानूनन दोषी माना गया है, उनके बारे में सरकार को सजा स्थगित करने, कम करने या घटाने का जो अधिकार या विशेषाधिकार प्राप्त है, क्या उसका उपयोग सही ढंग से किया गया है। प्रश्न यह है कि क्या विवेक का उचित ढंग से पालन किया गया है? महोदय! यह जानने के लिए कि माननीय गृह मंत्री ने इस प्राधिकार के अनुरूप कार्य का निष्पादन ठीक ढंग से किया है या नहीं, इसके लिए कुछ संभावनाओं को निकाल देना आवश्यक है। सर्वप्रथम, समाचार-पत्रों की रिपोर्ट से मिले तथ्यों के आधार पर, यह स्पष्ट है कि जो व्यक्ति बड़े पैमाने पर जुए में लिप्त थे, वे निश्चित रूप से गरीबी से पीडि़त नहीं थे, या अपना पेट भरने के लिए जुए जैसे घृणित कार्य में प्रवृत्त हुए हों। मामला निश्चित रूप से यह नहीं है। तथ्यों के अनुसार, ये लोग समृद्ध बनिए थे। उनके पास बहुत पूंजी थी, भारत के विभिन्न नगर के विभिन्न भागों में उनकी अनेक कंपनियां या प्रधान कार्यालय थे, और उनका व्यापार बड़े पैमाने पर चलता था। इसलिए इस मामले में ऐसा कोई तर्क पेश नहीं किया जा सकता है कि वे ऐसे दुर्भाग्यशाली लोग थे, जिन्हें अपनी गरीबी के कारण, अपनी विपरीत परिस्थितियों के कारण जुए जैसे कार्य का आश्रय लेने को बाध्य होना पड़ा। यह सफाई नहीं हो सकती, क्योंकि तथ्य इस तरह के निष्कर्ष के बिल्कुल विरुद्ध हैं। दूसरे, पेश की गई रिपोर्ट में और उच्च न्यायालय में दिए गए आवेदन में कम से कम यह नहीं कहा गया है कि इसके निलंबन का कोई अन्य आधार है। यह कहीं नहीं दर्शाया गया है कि ये दोनों मुजरिम बीमार थे या किसी बीमारी से पीडि़त थे; यह कहीं नहीं दर्शाया गया है कि इनके परिवारों पर कोई घरेलू संकट आ पड़ा था, जिसके कारण उन्हें दौड़ना जरूरी था। अपने सामने रखे तथ्यों से हमें यह भी नहीं पता चलता और सारे अनुशासन गलत हैं। तीसरे, जिस संभावना का सुझाव दिया

* बोंबे लेजिस्लेटिव असेम्बली डिबेट्स, खंड 3, पृ. 1692-93, 4 अप्रैल 1938