19. न्यायपालिका की स्वतंत्रता - Page 217

200 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

मत प्रकट करने में मुझे कोई हिचकिचाहट नहीं हो रही है। मैं माननीय गृह मंत्री से यह पूछना चाहता हूं कि क्या इस तरह का कृत्य जिसकी प्रत्यक्ष रूप से संतोषजनक व्याख्या नहीं की जा सकी, जो लोगों के मन में विश्वास उत्पन्न करे, क्या इससे इस प्रांत की प्रशासन की ईमानदारी के प्रति संदेह उत्पन्न नहीं हो जाएगा? महोदय! मैं इस संबंध में एक और प्रश्न प्रधानमंत्री से यह पूछना चाहता हूं कि क्या यह आदेश प्रधानमंत्री की जानकारी से जारी किया गया है? क्या यह आदेश मंत्रिमंडल की जानकारी से जारी किया गया है या केवल माननीय गृह मंत्री के द्वारा जारी किया गया है? महोदय! मैं विशेष कारण से यह सवाल पूछ रहा हूं। हम अनुमान लगा सकते हैं। यद्यपि इस मुद्दे पर हमारे पास कोई निश्चित प्रमाण नहीं है कि नए अधिनियम के अंतर्गत कांग्रेसी मंत्रिमंडल सामूहिक रूप से सामूहिक जिम्मेदारी की भावना से काम कर रहा है। इसलिए मैं यह मानने का अधिकारी हूं कि यह मामला पूरे मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया गया होगा, और यदि पूरे मंत्रिमंडल के समक्ष नहीं तो कम से कम प्रधानमंत्री के समक्ष तो आया ही होगा, जो इस प्रांत के प्रशासन के प्रति लोगों की निगाह में पूर्णतया उत्तरदायी हैं। मैं यह उल्लेख करने और इन प्रश्नों को पूछने के लिए बाध्य हूं, क्योंकि इसे मैं बहुत ही गंभीर मामला मानता हूं। अपराधी व्यक्ति को सुनाई गई सजा को निलंबित करना निश्चित रूप से कानून का उल्लंघन करना है और मैं कहता हूं कि जिस कृत्य में न्याय, प्रशासन तथा इस क्षेत्र के लोगों के कल्याण जैसी गंभीर बातें निहित हैं, वह प्रधानमंत्री की जानकारी के बिना संचालित नहीं किया जा सकता है। मैं यह अनुमान लगा रहा हूं और मैं जानना चाहता हूं कि क्या मेरा अनुमान सही है। मुझे आशा है मुझे अपने प्रश्न का उत्तर अवश्य मिलेगा (तालियां)।

श्री डब्ल्यू.एस. मुकादम : महोदय! क्या मैं जान सकता हूं कि इस सदन में कुछ पीने की अनुमति है। मैं एक तथ्य आपकी जानकारी में लाना चाहता हूं कि नगर आयोजन अधिनियम पर विचार-विमर्श के दौरान जब श्री मीरामस बोल रहे थे, मैंने व्यवस्था का प्रश्न उठाया था और माननीय इब्राहीम रहीमतुल्ला ने यह आदेश दिया था कि इस सदन में किसी भी पेय की अनुमति नहीं है। फिर श्री मीरामस के यह पूछने पर कि क्या पानी की अनुमति है, अध्यक्ष महोदय ने कहा था कि पानी की अनुमति नहीं है।

माननीय अध्यक्ष : मेरे ख्याल से इस सदन में कोई भी पेय न लेने की पंरपरा होना ज्यादा बेहतर है, यानी मेरा तात्पर्य पानी के अलावा किसी अन्य चीज से नहीं है (ठहाका)।

श्री डब्ल्यू.एस. मुकादम : श्री मीरामस ने पूछा था कि क्या इस सदन में पानी

* बोंबे लेजिस्लेटिव असेम्बली डिबेट्स, खंड 3, पृ. 1717-23, 4 अप्रैल 1938