20. पृथक कर्नाटक प्रांत का गठन - Page 223

206 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

को लाने वाले माननीय सदस्यों से मेरा निवेदन है कि वे सोचें कि मेरे कथन में कोई सार है कि उनके आदर्शों की पूर्ति तभी हो सकती है, जब कन्नड़ बोलने वाले समस्त लोगों के लिए अलग स्वायत्त सरकार बना दी जाए। ब्रिटिश भारत में कुछ जिलों में रहने वाले कुछ कन्नड़ बोलने वाले लोगों को अलग करके उनके लिए एक स्वायत्तशासी प्रांत बना दिया जाए। अगर मैं यह कहूं कि जब हमें पहले से ही पता हो कि कोई कदम हमें हमारे लक्ष्य तक नहीं पहुंचाएगा, तो ऐसा कदम उठाने का फायदा ही क्या?

इसलिए अब मैं दूसरे पहलू को लेता हूं। यदि कभी कन्नड़-भाषी लोगों को एक स्वायत्तशासी प्रांत के अंतर्गत एकत्र करना संभव नहीं तो मेरे मस्तिष्क में प्रश्न यह पैदा होता है कि क्या इस बहुभाषी प्रांत में कन्नड़ भाषियों के लिए कोई बाधा है, कोई कठिनाई है और क्या उन्हें इस प्रांत में सभी लाभ नहीं मिलते। मैंने व्यक्तिगत रूप से तो कहीं नहीं देखा कि इस बहुभाषी प्रशासन में किसी बाधा से पीडि़त होना पड़ता है।

महोदय! अब इस प्रश्न पर मैंने दो भिन्न-भिन्न दृष्टिकोणों से विचार किया है। सबसे पहले मैंने देखा है कि नई सरकार में पदों का विभाजन किस तरह हुआ है? क्या इसके कारण उन्हें कोई हानि उठानी पड़ी? क्या उन्हें उससे कम प्रतिनिधित्व मिला है, जिसके वे अधिकारी थे। जिस दूसरी बात की मैंने जांच की है, वह यह है कि क्या इस सदन में उनके सदस्यों की संख्या उससे कम है, जिसके कि वे अधिकारी हैं। महोदय! मैंने ये आंकड़े एकत्र किए हैं और ये आंकड़े एकत्र करते समय मैंने मिश्रित क्षेत्र छोड़ दिए हैं। बंबई नगर पूर्ण रूप से न तो मराठी भाषी है, न ही गुजराती भाषी, और न ही कन्नड़ भाषी है। मैं इन क्षेत्रों को एक तरफ छोड़ता हूं, मैं उन सीटों के संबंध में भी विचार नहीं कर रहा हूं, जो विशेष हितों के लिए रखी गई हैं, और अब इन आंकड़ों पर आता हूं। जहां तक जनसंख्या का सवाल है मराठी बोलने वालों की संख्या 98,68,795 है। निस्संदेह मराठी बोलने वालों में मैं हिन्दू, मुसलमान और अनुसूचित जाति सबको शामिल करता हूं। मैं केवल भाषा का आधार ले रहा हूं — गुजराती बोलने वालों की संख्या 34,22,139 और कन्नड़ बोलने वालों की 32,66,233 है। अब इस सदन में सीटों की स्थिति यह है; पूर्णतः जनसांख्यिक आधार पर मराठी बोलने वाले लोगों को 81 सीटें मिलीं, जिसको आदर्श या मानक के आधार पर निर्णय करने पर मैंने पाया कि गुजराती बोलने वालों को 27 सीटें मिलनी चाहिए थीं। वितरित की गई पुस्तक के अनुसार कन्नड़ बोलने वालों की संख्या का कुल जोड़ 12 प्रतिशत है। और उस आधार पर वे 21 सीटों के अधिकारी हैं। वास्तव में उनके पास कितनी सीटें हैं? गुजराती बोलने वाले लोगों को 31 सीटें मिलीं, जबकि वास्तव में वे सिर्फ 27 सीटों के अधिकारी थे। कन्नड़ बोलने वाले लोगों को 28 सीटें प्राप्त हुईं, जबकि वास्तव में वे सिर्फ 21 सीटों के अधिकारी थे।