208 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : महोदय! अगर आप मुझसे पूछते . . .
माननीय अध्यक्ष : मैं माननीय सदस्य को बहस के बीच में रोकना नहीं चाहता, लेकिन मैं उन्हें भाषण की समय-सीमा के बारे में याद दिलाना चाहूंगा, ताकि वह अपनी बात को संक्षेप में रख सकें।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : इस वित्तीय प्रश्न के संदर्भ में मैं जो कहना चाहता हूं, वह यह है कि वितरित की गई पुस्तक में कई आंकड़े दिए गए हैं। परिशिष्ट ‘ख’ में बताया गया है कि नए कन्नड़ भाषी प्रांत का खर्च करीब 2 करोड़ रुपए होगा और कुल राजस्व 2.57 लाख रुपए होगा। अब मुझे यह नहीं पता कि इस परिशिष्ट में दिए गए आंकड़े में किस हद तक प्रांत के प्रशासन को चलाने के लिए आवश्यक पूरक व्यय को शामिल किया गया है। मैं यहां केवल राजस्व और खर्च के मुद्दों के अंतर्गत मात्र रकम को देख रहा हूं। मुझे इसमें उस व्यय को कोई जिक्र दिखाई नहीं देता है, जो गवर्नर, उसके निजी स्टाफ, सचिवों, मंत्रियों और जन सूचना के निदेशक को वेतन देने के लिए उठाना आवश्यक होता है और जो पुलिस के इंस्पेक्टर जनरल, स्वास्थ्य अधिकारी — उन समस्त वरिष्ठ अधिकारियों के लिए आवश्यक होगा, जिनकी प्रशासन के लिए जरूरत है।
श्री वी.एन. जोग : इन आंकड़ों को आप दूसरी पुस्तक में परिशिष्ट ‘ख’ में देख सकते हैं।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : हो सकता है। पर, महोदय! अगर एक क्षण के लिए यह मान लिया जाए कि यह बजट वैसा होगा, जैसा यहां बनाया गया है तो 5 या कुछ लाख रुपए की बचत होनी चाहिए। मैं यह प्रश्न पूछना चाहता हूं कि क्या यह राजस्व वह सब प्रदान करने के लिए पर्याप्त होगा, जो एक आधुनिक प्रशासन को प्रदान करना चाहिए? अगर मेरे माननीय मित्र जानना चाहें कि बंबई नगरपालिका का राजस्व कितना है, तो उन्हें पता चलेगा कि नए प्रांत का राजस्व बंबई नगरपालिका की तुलना में आधा भी नहीं है। बंबई नगरपालिका का राजस्व 4 करोड़ रुपए है और 4 करोड़ से भी बंबई नगरपालिका वह सब नहीं कर पा रही है, जो कि एक आधुनिक सरकार को करना चाहिए। मैं सचमुच पूछता हूं, और बड़ी गंभीरतापूर्वक पूछता हूं, कि क्या यह विचारणीय विषय नहीं है। मेरे विद्वान मित्र ने इस बहस के दौरान उड़ीसा के प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए भाषण का उल्लेख किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि समस्त अंगों (विभागों) को एकत्र कर दिया गया है। मुझे नहीं पता कि मेरे माननीय मित्र तब क्या कहेंगे, अगर मैं उन्हें कहूं कि अंगों को एकत्रित करना उतना महत्त्वपूर्ण नहीं है, जितना कि उन्हें भोजन उपलब्ध कराना। इस प्रश्न पर विचार करने की आवश्यकता है। महोदय! मैं अवश्य कहूंगा और जोर देकर कहता हूं कि मामूली स्थानीय निकायों के बराबर राजस्व के साथ इस देश में लोगों का छोटे-छोटे निकायों में बंटा होना बहुत ही हृदयविदारक बात