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विधान सभा प्रक्रिया [*]
डॉ. भीमराव अम्बेडकर (बंबई नगर) : महोदय! मैं इस संशोधन के संदर्भ में आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। सर्वप्रथम, भारत सरकार अधिनियम की धारा 73, उप-खंड (2) की ओर मेरा पहला निवेदन यह है कि यह नियम, धारा 73 उप-खंड (2) के संबंध में, इस सदन के अधिकार क्षेत्र के बाहर होगा। धारा 73 के अनुसार :
- इस अधिनियम के इस अंश के अनुसार, जब तक कोई विशेष उपबंध न
हो, जिस प्रांत में विधान परिषद है, वहां कोई भी विधेयक किसी भी सदन
में रखा जा सकता है।
- प्रांत के विधान-मंडल में विचाराधीन विधेयक सदन या सदनों के सत्रावसान
के कारण रद्द नहीं होना चाहिए।
मैं इसलिए धारा 73 के उप-खंड (2) में निहित प्रावधानों को ध्यान में रखकर निवेदन करता हूं कि इस सदन के लिए यह नियम बनाना उचित नहीं होगा कि दो सत्रों के बाद या एक वर्ष खत्म होने के बाद कोई विधेयक रद्द हो जाएगा, जैसा कि मेरे माननीय मित्र श्री गुप्ते द्वारा संशोधन का सुझाव दिया गया है। इस नियम के संदर्भ में यह मेरा पहला निवेदन है।
इस नियम के संदर्भ में मेरा दूसरा निवेदन यह है कि यह नियम इस सदन
द्वारा पहले से पारित नियम 19 के अनुकूल नहीं है। नियम 19 के अनुसार :
सत्रावसान होने पर, सिवाए प्रश्नों, कानूनी प्रस्तावों, नियमों के संशोधन प्रस्तावों,
उन प्रस्तावों के जिन पर नियम 34 के अनुसार अगले सत्र तक विचार करना
स्थगित कर दिया हो और उन विधेयकों को छोड़कर जिन्हें प्रस्तावित किया
गया हो, समस्त विचाराधीन सूचनाएं रद्द होंगी।
इसलिए विधेयक संबंधी प्रस्तावों को नियम 19 ने बचा लिया है। उन पर नियम 19 लागू नहीं होता और मेरा निवेदन यह है कि यह तथ्य ध्यान में रखकर कि सदन नियम 19 पहले ही पारित कर चुका है, वह अब न तो नियम 103 को, न ही