विधान सभा प्रक्रिया
प्रस्तावित संशोधन को पास करने के लिए कार्यवाही कर सकता है।
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मेरा तीसरा निवेदन यह है कि अगर यह मान लिया जाए कि इस सदन के पास नियम को और प्रस्तावित संशोधन को पारित करने का अधिकार है, इस तथ्य के बावजूद कि भारत सरकार अधिनियम की धारा 73 के उप-खंड (2) में स्पष्ट प्रावधान है और इस तथ्य के बावजूद कि यह सदन पहले ही नियम 19 को पारित कर चुका है, मुझे यह लगता है कि यह नियम वास्तव में अनावश्यक है। इस नियम के अनुसार ‘अगर कोई प्रस्ताव नहीं किया’, मुझे यहां कहीं भी शब्द ‘प्रस्ताव’ की परिभाषा नहीं मिलती है। मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि जब तक सचिव द्वारा किसी विधेयक की मांग न की जाए, तब तक कोई भी व्यक्ति अन्य प्रस्ताव रखने की स्थिति में नहीं होता है। इसका अर्थ यह है कि विधेयक अवश्य ही कार्य-सूची में होगा। दूसरे, वह आदेश-पत्र पर अवश्य होगा; और तीसरे, सचिव के द्वारा मांग की गई होगी। मेरा निवेदन यह है कि जब तक सचिव के द्वारा विधेयक की मांग न की जाए, विधेयक के प्रभारी किसी भी सदस्य को इस प्रस्ताव द्वारा दंडित न किया जाए, जैसा कि उसे अन्यथा किया जाएगा, मेरा निवेदन है कि यह कोई व्यतिक्रम नहीं होगा।
माननीय अध्यक्ष : यह कमोबेश नियम के गुणावगुणों पर बहस होगी।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : यही मैंने कहा है। यह तीसरा विचार था। पहले दो थे. .।
माननीय अध्यक्ष : मेरे ख्याल से पहले मैं इन दोनों को निबटा दूं और फिर माननीय सदस्य गुण-दोष के आधार पर दलील के रूप में कठिनाइयों के संदर्भ में अपनी बात प्रस्तुत कर सकते हैं।
दो मुद्दे उठाए गए हैं, उनमें से पहला यह है कि भारत सरकार अधिनियम की धारा 73 के प्रावधानों को ध्यान में रखकर इस तरह के नियमों को बनाने के लिए यह सदन सक्षम नहीं है। मैंने इस पहलू पर विचार किया है, क्योंकि पिछली बार विचार के लिए जब नियम 103 लिया गया था, तब माननीय प्रधानमंत्री द्वारा यह आपत्ति उठाई गई थी। धारा 73 के उप-खंड (2) में कहा गया है कि विधान-मंडल में विचाराधीन विधेयक सदन या सदनों के सत्रावसान से रद्द नहीं होना चाहिए। निस्संदेह यह कहा गया है कि सत्रावसान के कारण इसे रद्द नहीं होना चाहिए, लेकिन इसलिए इसका मतलब यह नहीं है कि सत्रावसान के सिवाए अन्य कारणों से भी विधेयक कभी रद्द नहीं हो सकता। इस नियम में यह व्यवस्था की गई है कि सत्रावसान हो या न हो, एक निश्चित अवधि के बाद एक विधेयक रद्द हो जाता है। अगर वाक्य रचना में ‘दो पूर्ण सत्रों’ का जिक्र है तो संदेह के लिए शायद गुंजाइश रह सकती थी। लेकिन जब एक निश्चित समय प्रदान करना है, जैसा कि अब प्रस्तावित किया गया है, वस्तुतः कोई विधेयक इस नियम के अंतर्गत सत्र के दौरान भी एक वर्ष बाद रद्द किया जा सकता है। इसलिए प्रस्तावित नियम के अंतर्गत सत्रावसान