1. बजट पर चर्चा - Page 23

6 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

केवल 74 लाख रुपए का ही राजस्व प्राप्त हुआ। इस प्रकार आप देखेंगे कि राजस्व में बढ़ोतरी नहीं हो रही है। लेकिन जब आप वनों पर होने वाले व्यय को देखेंगे, तो आप पाएंगे कि व्यय 40 लाख रुपए से बढ़कर 48 लाख रुपए हुआ है। अंततोगत्वा, यदि वनों से होने वाले लाभ के बारे में बात करें, तो आप पाएंगे कि लगभग चार लाख रुपए का घाटा है।

अध्यक्ष महोदय! अब मैं सिंचाई और लोक-निर्माण के बारे में बोलना चाहता हूं। मैं जानता हूं कि विवरण देने से मेरा समय बरबाद होगा। लेकिन मैं एक बात अवश्य पूछना चाहता हूं कि जब सरकार कोई उद्योग या निर्माण अपने हाथ में लेती है तो क्या वह इस कार्य को प्रधानतया राजस्व प्राप्ति के लिए करती है, या यह प्रधानतया सेवा के लिए करती है, यद्यपि संयोग से राजस्व भी प्राप्त हो जाता है, या फिर यह प्रधानतया सेवा के लिए ही करती है? मैं नहीं मानता कि सरकार ने जो सेवा संबंधी काम अपने हाथ में लिए हैं, उस संबंध में सरकार की कोई निश्चित या परिभाषित नीति है। उदाहरण के लिए मैं व्यक्तिगत रूप से महसूस करता हूं कि इस संबंध में मेरे और सदन के दूसरे माननीय सदस्यों में मतभेद हो सकता है। लेकिन मैं महसूस करता हूं कि सिंचाई विभाग से जितनी आय अपेक्षित है, वह नहीं होती। मेरे माननीय मित्र कर जांच समिति की रिपोर्ट देखें, तो उन्हें पता चलेगा कि पानी की दर बहुत कम है। मेरे विचार से सदन के इस पक्ष के हम सभी सदस्यों का अधिकार है कि हम वित्त सदस्य से प्रेसिडेंसी के स्रोतों के अच्छे प्रबंध की अपेक्षा करें।

अध्यक्ष महोदय! अब मैं इस बजट के व्यय के बारे में विचार प्रस्तुत करूंगा। मैं जानता हूं कि इस सदन के अधिकांश सदस्य घाटे से व्याकुल हो गए होंगे। मैं कह सकता हूं कि मैं नहीं हुआ हूं। घाटा कोई ऐसी चीज नहीं है, जिससे माननीय सदस्यों को भयभीत होना चाहिए। मुझे जिस बात ने व्याकुल किया है, वह यह है कि बजट का घाटा किसी सामाजिक विकास की बड़ी नीति को अपनाए जाने के परिणामस्वरूप नहीं हुआ, बल्कि घाटा पूर्णतः प्रशासन के अनुत्पादक खर्च में बढ़ोतरी के कारण हुआ है।

अध्यक्ष महोदय! मैं कहूंगा कि माननीय सदस्य, वित्त विभाग के सचिव, ने कल सदस्यों को यह कहकर कि वे समझदारी से काम लें, बहुत बुद्धिमत्ता दिखाई। उन्होंने कहा था कि यदि सदन के सदस्य चाहते हैं कि सरकारी पक्ष के सदस्य उन्हें गंभीरता से लें, तो उन्हें तर्कसंगत होना चाहिए। अध्यक्ष महोदय! मैं उस दलील के महत्त्व को स्वीकार करता हूं। लेकिन मैं यह दलील उनके पास वापस भेजना चाहता हूं और पूछना चाहता हूं कि इस प्रेसिडेंसी के व्यय में जो वृद्धि हुई है, क्या वह न्यायोचित है और क्या प्रशासन की गुणवत्ता के आधार पर उसे न्यायसंगत सिद्ध किया जा सकता है?

अध्यक्ष महोदय! अगर आप परिषद के प्रशासन के खर्चे की वर्ष 1910 से लेकर वर्ष 1927-28 तक की तुलना करें और मैं तुलना के लिए ऐसे विभागों के आंकड़े ले