बजट पर चर्चा
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रहा हूं, जो उस समय पूरी तरह से प्रांत स्तर के थे और आज भी हैं, तो आप पाएंगे कि सामान्य प्रशासन का खर्च वर्ष 1910-11 में 17 लाख रुपए था। आज वही 126 लाख रुपए हो जाता है। मैं माननीय वित्त सचिव से पूछना चाहता हूं कि क्या यह न्यायोचित है।
श्री जी. विल्स : यदि माननीय सदस्य मुझे इजाज़त दें, तो मैं उन्हें यह बताना चाहता हूं कि कल मैंने माननीय सदस्य राव साहब दादूभाई देसाई को स्पष्ट किया था कि बजट के वक्तव्य में जो आंकड़े दिए गए हैं, उनको बहुत सावधानी से इस्तेमाल करने की आवश्यकता है। सुधारों के पहले जो सामान्य प्रशासन का वर्गीकरण था, वह वर्गीकरण इस समय नहीं है। इस समय भूमि-हस्तांतरण पर होने वाले खर्च की मद अन्य शीर्ष के अंतर्गत रखी गई थी, लेकिन उसे इस समय सामान्य प्रशासन के शीर्ष के अंतर्गत शामिल किया गया है।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : जो कुछ भी हो, विवरणों में जो भी दिया गया है, हम उसे मानने के लिए बाध्य हैं, बशर्ते कि उनमें संशोधन कर लिए गए हों, जैसा कि मेरे माननीय मित्र ने कहा है। मेरे विचार में इस प्रेसिडेंसी के सामान्य प्रशासन का व्यय बहुत ज्यादा है। वास्तव में, इस प्रेसिडेंसी के पुराने इतिहास को ध्यान में रखने पर भी इसका कोई औचित्य नहीं है। उदाहरण के तौर पर आज हमारे पास चार कार्यकारी पार्षद, तीन मंत्री और उनके मातहत काम करने वाले लगभग 25 सचिव तथा उप-सचिव हैं। मेरा मानना है कि मेरे माननीय मित्र वित्त सचिव भी इसे न्यायसंगत नहीं कहेंगे। माननीय वित्त सदस्य ने इस प्रेसिडेंसी के प्रशासन की अत्यधिक फिजूलखर्ची का बचाव करने का बहुत प्रयास किया है। मैं आशा करता हूं, अध्यक्ष महोदय मुझे कुछ समय और देंगे।
माननीय अध्यक्ष : नहीं, माननीय सदस्य को समझना चाहिए कि मेरे पास समय की बहुत कमी है। उनके पास बोलने के लिए दो मिनट का समय और है।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : अध्यक्ष महोदय! ठीक है। मुझे जो कहना था, अब नहीं कह सकूंगा। मैं अब अपनी बात समाप्त कर रहा हूं। अध्यक्ष महोदय! मैं अपने वक्तव्य के इस भाग में अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहता हूं। हम अपने माननीय सदस्यों से सुन रहे हैं कि बहुत ज्यादा छंटनी होनी चाहिए। मैं इसके लिए इनका पूरी ईमानदारी से समर्थन करता हूं, क्योंकि मैं विश्वास करता हूं कि अभी छंटनी की बहुत गुंजाइश है। लेकिन, महोदय! मैं इस तथ्य को अनदेखा नहीं कर सकता कि प्रस्तावित छंटनी से कोई बहुत भारी सफलता नहीं मिलने वाली है। छंटनी करने पर भी हमें एक या दो करोड़ की ही राहत मिल सकती है। लेकिन क्या इससे हमारी समस्या का निदान हो सकेगा? मैं जानता हूं कि इस उपाय से हम बजट को संतुलित कर सकेंगे। लेकिन क्या बजट को संतुलित करना ही इस सदन की एकमात्र आकांक्षा है? मैं महसूस करता हूं कि मेरा यह कहना सही है कि अनिवार्य शिक्षा, चिकित्सा की सुविधा, नशाखोरी से लोगों को मुक्ति दिलाने और जीवन की सभी सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिए