विधान सभा प्रक्रिया
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जानना चाहता हूं कि जिन लोगों ने मेरे साथ इस नियम पर विचार-विमर्श किया है, वह क्या कहना चाहते हैं, क्योंकि पिछली ही रात को हम सबने इस संशोधन पर सहमति दी थी। माननीय सदस्य श्री अली बहादुर खान वहां थे और उन्होंने सदन के समक्ष एक वैसा ही संशोधन रखा था कि ये शब्द जोड़े जाएं यद्यपि ‘ऐसा करने के लिए मांग की गई थी।’ यह माननीय सदस्य अली बहादुर खान का संशोधन था और हम विभिन्न प्रस्तावों के गुण-दोष की चर्चा करते हुए इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि अंततः यही बेहतर समाधान है। माननीय सदस्य ने जो संवैधानिक आपत्तियां उठाई हैं, वे भी हमारे दिमाग में थीं। हमारा दुर्भाग्य यह है कि माननीय सदस्य कभी-कभी सदन में आते हैं और परिस्थिति को न जानते हुए वह पहले क्या घटा इसकी कड़ी जोड़ने की स्थिति में नहीं होते हैं। इसलिए मैं उनके द्वारा प्रस्तावित संशोधन में जोड़ने के ढंग पर दिए सुझाव के गुणावदोष पर कुछ नहीं कहना चाहता हूं। मैं उन्हें केवल सिद्धांत बताता हूं, जिसने वर्तमान नियमों में इस नियम को सम्मिलित करना आवश्यक बना दिया है और यह भी बताऊंगा कि पुराने नियमों में भी ऐसे प्रावधान थे। उसके अनुसार :
दो सत्रों के दौरान अगर प्रभारी सदस्य उसके संदर्भ में कोई प्रस्ताव नहीं
रखता तो विधेयक रद्द हो जाएगा, जब तक कि विधान सभा उस सदस्य द्वारा
प्रस्तावित प्रस्ताव पर अगले सत्र में विधेयक को जारी रखने का विशेष आदेश
नहीं देती।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : क्या माननीय प्रधानमंत्री को स्मरण है कि वह उस समय संगत था, क्योंकि जैसा कि मैंने उल्लेख किया है कि पुराने भारत सरकार अधिनियम में ऐसा प्रावधान नहीं था।
* बोंबे लेजिस्लेटिव असेम्बली डिबेट्स, खंड 4, पृ. 1330-59, 15 सितंबर 1938