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औद्योगिक विवाद विधेयक

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जहां तक विधेयक के अन्य उपबंधों का संबंध है, मैं हड़तालों से संबंधित उस महत्त्वपूर्ण उपबंध का उल्लेख करना चाहता हूं, जिसका प्रबल विरोध इस सदन के साथ-साथ वह दल भी करता है, जिसका मैं सदस्य हूं। अब यह विधेयक किन्हीं परिस्थितियों में हड़तालों को अवैध करार देता है। जिन प्रावधानों में हड़तालों को अवैध घोषित किया गया है, वे विधेयक के खंड 62 में सम्मिलित हैं, जो उसका सबसे महत्त्वपूर्ण खंड है। उसके अनुसार :

  1. (1) प्रारंभ हुई अथवा जारी रहने वाली ऐसी कोई भी हड़ताल अवैध होगी

(क) यदि वह अनुसूची- I में उल्लिखित किसी औद्योगिक मामले से संबंधित

है अथवा जो ऐसे मामले से संबंधित स्थायी आदेश दिए जाने से पहले

और धारा 26 के अंतर्गत श्रम आयुक्त जो प्रस्तुत किए जाने तथा

उसके द्वारा अथवा औद्योगिक अदालत द्वारा, जैसा भी मामला हो,

निपटाए जाने से पूर्व अथवा धारा 26 के अंतर्गत ऐसे स्थायी आदेशों

के प्रवृत्त होने से एक वर्ष की समाप्ति से पूर्व की जाती है,

(ख) धारा 28 के प्रावधानों के अनुसार सूचना दिए बिना की जाती है,

(ग) केवल इसलिए की जाती है कि नियोक्ता द्वारा स्थायी आदेश के

उपबंधों का पालन नहीं किया गया अथवा यदि उसने इसमें कोई

अवैध परिवर्तन कर दिया है,

(घ) ऐसे मामले में जहां धारा 28 के उपबंधों के अनुसार परिवर्तन की

सूचना दे दी गई हो और जहां ऐसे परिवर्तन के मामले में, पंजीयक

द्वारा धारा 34 में उल्लिखित प्रकरण के विवरण की प्राप्ति से पूर्व कोई

समझौता न किया गया हो,

(च) ऐसे मामले में, जहां ऐसी कार्यवाहियों के समाप्त होने से पहले ही

हड़ताल से संबंधित औद्योगिक विवादों के संबंध में समझौते की

कार्यवाही आरंभ हो गई हो,

(छ) पंजीकृत समझौते, निपटान या निर्णय की शर्तों का उल्लंघन करने

की दशा में,

(2) ऐसे मामलों में, जहां किसी भी औद्योगिक विवाद के संदर्भ में समझौते

की कार्यवाहियां समाप्त हो गई हों, वहां ऐसी कार्यवाहियों की समाप्ति

के दो महीने बाद ऐसे विवादों से संबंधित हड़ताल शुरू करने की

स्थिति में अवैध मानी जाएगी।

फिर, इस धारा को प्रभावशाली बनाने के लिए इस विधेयक में, अवैध हड़तालों में हिस्सा लेने पर कुछ जुर्माना करने की व्यवस्था है। ये खंड 66 और 67 हैं। खंड 66 के अनुसार :