22. औद्योगिक विवाद विधेयक - Page 237

220 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

कोई भी कर्मचारी, जो हड़ताल पर हो या जो ऐसी हड़ताल में शामिल होता

है, जिसे औद्यागिक अदालत ने अवैध घोषित कर दिया हो, तो उसे दोषी पाए

जाने पर या तो छह महीने की जेल की सजा दी जा सकती है या जुर्माना हो

सकता है या दोनों किए जा सकते हैं।

खंड 67 के अनुसार :

अगर कोई व्यक्ति अन्य लोगों को ऐसी हड़ताल या तालाबंदी में भाग लेने के लिए

भड़काता है या किसी प्रकार की सहायता करता है, जिसे औद्योगिक अदालत

द्वारा अवैध घोषित किया गया हो, चाहे ऐसी हड़ताल या तालाबंदी शुरू हुई या

नहीं, दोषी पाए जाने पर या तो उसे छह महीने की जेल की सजा होगी या

जुर्माना होगा या दोनों ही किए जा सकते हैं।

व्याख्या — इस धारा के उद्देश्यों के लिए ऐसे व्यक्ति को, जो किसी भी हड़ताल या तालाबंदी के लिए चंदा इकट्ठा करने में सहयोग देता है, या मांगता है, यह माना जाएगा कि वह ऐसी हड़ताल या तालाबंदी को प्रोत्साहन दे रहा है।

महोदय! अब यह कहा गया है कि ये खंड न्यायसंगत हैं क्योंकि अधिकार के रूप में हड़ताल करने जैसी कोई बात नहीं है, और इसलिए यह विधेयक जिसे मजदूर हड़ताल करने का अधिकार कहते हैं, उस पर जुर्माना लगाकर निश्चित रूप से किसी भी नैतिकता के नियम या किसी न्यायशास्त्र के नियम का उल्लंघन नहीं कर रहा है। महोदय! इस भाषण में ऐसे तर्क का ख्ांडन करना और ऐसी स्थिति का परित्याग करना मेरा सबसे पहला मामला होगा। अब अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए मैं बिल्कुल प्राथमिक प्रस्तावों से शुरू करूंगा। सर्वप्रथम मैं यह स्पष्ट कर दूं कि हम ‘हड़ताल’ शब्द से क्या समझते हैं। उसका क्या अर्थ है? मैं सोचता हूं कि ‘हड़ताल’ शब्द का अर्थ समझ लेना बेहतर होगा। सामान्य प्रचलित भाषा में हड़ताल, सेवा-अनुबंध के उल्लंघन के सिवाए और कुछ नहीं है। जब एक मजदूर हड़ताल करता है, तो इसका अर्थ यह है कि वह सेवा के अनुबंध का उल्लंघन कर रहा है। इसमें, इससे अधिक और कुछ नहीं है और इससे कम भी कुछ नहीं है। मैं अगला प्रश्न यह पूछना चाहता हूं कि इस सेवा अनुबंध के उल्लंघन पर कानून द्वारा क्या विचार किया जाता है? जैसा कि यह आज भी भारतीय संविधि संग्रह में विद्यमान है। क्या भारतीय कानून हड़ताल के अधिकार को मान्यता देता है या नहीं? और अगर वह देता है, तो किस रूप में और अगर वह दंड देता है, तो किस ढंग से देता है? महोदय! यहां मैं फिर प्राथमिक प्रस्ताव से शुरू करता हूं और वह प्राथमिक प्रस्ताव यह है कि कोई कृत्य अथवा अकर्मण्यता दीवानी त्रुटि का मामला हो सकता है या वह अपराध हो सकता है। मैं पहला प्रश्न यह पूछना चाहता हूं। मैं सचमुच इस मामले में विस्तृत रूप से विचार करना चाहता हूं क्योंकि मैं इस मामले में अपनी स्थिति के संबंध में कोई संदेह नहीं छोड़ना चाहता। पहला प्रश्न मैं यह पूछना चाहता हूं; क्या