1. बजट पर चर्चा - Page 25

8 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

परिषद अपनी इच्छा के प्रति ईमानदार है। अब मैं सदन को सचेत करना चाहता हूं कि अच्छे काम करने के लिए कठिन परिश्रम करने की आवश्यकता होती है। हर तरक्की की कीमत अदा करनी पड़ती है और जो लोग इसके लिए त्याग करते हैं, उन्हें तरक्की के लाभ मिलते हैं।

II *

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : महोदय! यह घाटे का बजट होने के कारण निस्संदेह एक निराशाजनक बजट है। लेकिन यह केवल घाटे की वजह से निराशाजनक होता, तो उसे गंभीरता से लेना मेरे लिए बिल्कुल जरूरी नहीं था। चाहे जो भी हो, बजट केवल निराशाजनक नहीं है, बल्कि मेरे विचार से निंदनीय भी है और स्थिति वास्तव में बहुत गंभीर है।

महोदय! आप जानते हैं कि हम लोग व्यावहारिक रूप से ‘मोंटेग्यू चेम्सफोर्ड सुधारों’ के प्रथम दशक को पूरा करने जा रहे हैं। इसलिए हम लोगों के लिए 1921 से अब तक की स्थिति का आकलन करना अवश्य ही लाभदायक होगा। महोदय! इन सुधारों को इसलिए शुरू किया गया था कि सरकार की ओर से स्थानांतरित विषयों को सुरक्षित विषयों से ज्यादा ध्यान मिले। लेकिन, महोदय! यदि हम 1921 से अब तक प्रेसिडेंसी के खर्चों का विश्लेषण करें, तो हमें क्या ज्ञात होता है? हमारी यह आशा पूरी नहीं हुई कि नए शासन में विकासोन्मुख उद्देश्यों पर होने वाले खर्च को उन विषयों के मुकाबले जो केवल कानून और शांति व्यवस्था को कायम रखने में मदद करते हैं, प्राथमिकता दी जाएगी।

मैं इस बात को स्पष्ट करना चाहूंगा। मैंने विभिन्न प्रांतों में ‘हस्तांतरित’ और ‘आरक्षित’ विभागों पर हुए खर्च के कुछ आंकड़े एकत्रित किए हैं। महोदय! आपकी अनुमति से मैं उन आंकड़ों को सदन के समक्ष प्रस्तुत करना चाहता हूं, ताकि सदन को ज्ञात हो सके कि स्थिति कितनी शोचनीय है। जो आंकड़े मैं दे रहा हूं, वे वर्ष 1921-22 और वर्ष 1925-26 के विभिन्न प्रांतों में हस्तांतरित और आरक्षित विभागों के खर्चों में हुए प्रतिशत में कमी या वृद्धि को तुलनात्मक ढंग से प्रस्तुत करते हैं। ये आंकड़े इस प्रकार हैं :

प्रांत आरक्षित विभाग हस्तांतरित विभाग

वृद्धि, प्रतिशत कमी, प्रतिशत वृद्धि, प्रतिशत कमी, प्रतिशत मद्रास 1.21 - 14.26 - बंबई 6.33 - 5.82 - बंगाल - - 6.11 - संयुक्त प्रांत [] - - 12.57 - *  बोंबे लेजिस्लेटिव काउंसिल डिबेट्स, खंड 22, पृ. 167-70, 21 फरवरी 1928 आरक्षित विभागों के खर्च में कमी