22. औद्योगिक विवाद विधेयक - Page 241

224 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

हम विधिवेत्ताओं की महान संस्था के इस विचार से सहमत हैं कि सामान्य रूप

से अनुबंध का उल्लंघन मात्र अपराध नहीं होना चाहिए, बल्कि यह केवल दीवानी

मुकदमें का विषय हो सकता है। इस सामान्य नियम के बावजूद भी कई अपवाद

हैं। कई अनुबंधों के उल्लंघन संभवतः बुराई का कारण बन सकते हैं, जिनका

कोई हरजाना नहीं है या केवल बहुत ज्यादा हरजाने से ही जिनकी प्रति-पूर्ति

की जा सकती है, जो संभवतः किसी व्यक्ति द्वारा करनी अत्यधिक असंभव हो।

हम सोचते हैं कि अनुबंधों के ऐसे उल्लंघन दंड विधान के उचित विषय हो

सकते हैं जिन पर दंड दिया जा सकता है।

उन विभिन्न तरह के कृत्यों के समस्त अनाचरणों के विस्तृत सर्वेक्षण के बाद, उन्होंने पाया कि अकर्मण्यता ही वह कृत्य है, जिस पर दंड दिया जा सकता है। नैतिकता व विधि शास्त्र के प्रावधानों के समनुरूप, ये तीन प्रावधान ही थे, और इनसे ज्यादा कुछ नहीं था। महोदय! अब यह कहा गया है कि हड़ताल करना अधिकार जैसी कोई चीज नहीं है। मेरा उत्तर यह है कि ऐसी बात वही व्यक्ति कर सकता है, जो सचमुच में नहीं जानता कि हड़ताल क्या है? अगर सदस्य ‘हड़ताल’ शब्द के मेरे अर्थ को मानने को तैयार है, जो कि सेवा के अनुबंध के उल्लंघन के सिवाए और कुछ नहीं है, तब मैं निवेदन करूंगा कि हड़ताल सिर्फ स्वतंत्रता के अधिकार का दूसरा नाम है। यह किसी भी शर्त पर, किसी की नौकरी की स्वतंत्रता के अधिकार के सिवाए और कुछ नहीं है जिसे कोई भी व्यक्ति प्राप्त करना चाहता है। एक बात और है कि आप स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान कर देते हैं — आप आवश्यक रूप से हड़ताल का अधिकार प्रदान कर देते हैं, क्योंकि जैसा कि मैंने कहा है — हड़ताल करने का अधिकार सिर्फ स्वतंत्रता के अधिकार का दूसरा नाम है। यह कहना हास्यास्पद है कि स्वतंत्रता का अधिकार राजाओं के दैविक अधिकारों जैसा है। महोदय! मैं इसके जवाब में सिर्फ यही कहना चाहता हूं कि काव्यात्मक कथन या रोचक चित्रण से तर्क को समाप्त नहीं किया जा सकता। मैंने कहीं भी ऐसा परिणाम नहीं देखा है — कम से कम अदालतों में तो नहीं। अगर आप जानते हैं कि स्वतंत्रता का अधिकार दैविक अधिकार है, फिर मैं दावा करता हूं कि हड़ताल का अधिकार भी दैविक अधिकार है। इसके अतिरिक्त मैं कहता हूं कि चूंकि दस लोग या बीस लोग या दो सौ लोग एक साथ हड़ताल की घोषणा करते हैं, जहां तक कानून का सवाल है स्थिति में इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। महोदय! मैं जानता हूं कि कई लोग भारतीय दंड संहिता की धारा 120क की ओर संकेत करेंगे। अतः इस विषय से हटने से पहले, मैं इस मामले पर विचार करूंगा जो भारतीय दंड संहिता की धारा 120क के संदर्भ में है। मैं सोचता हूं कि क्या विपक्ष के सदस्य इस पर बहस करना चाहते हैं कि हड़ताल करने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि मजदूरों की किसी संस्था द्वारा की गई हड़ताल एक षड्यंत्र है। अगर वे ऐसा करते हैं, तो मैं चाहूंगा कि विपक्ष के जो लोग यह मानने के लिए कि हड़ताल करने का अधिकार नहीं है, धारा 120क पर