औद्योगिक विवाद विधेयक
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निर्भर करते हैं, वे यह प्रमाणित करें कि हड़ताल एक षड्यंत्र है। जब तक कि वे यह प्रमाणित नहीं करते कि हड़ताल एक षड्यंत्र है, धारा 120क लागू नहीं होगी और मैं दावा करता हूं कि हड़ताल षड्यंत्र नहीं है।
एक माननीय सदस्य : कौन कहता है कि यह अनुप्रयोज्य है? यह जनोपयोगिता का मामला है।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : मैं जनोपयोगिता के प्रश्न पर बाद में बात करूंगा। महोदय! दुर्भाग्यवश हमारे पास भारत में कोई सुनिश्चित मामला नहीं है। मेरा अनुसंधान उस मामले का प्रतिफल नहीं है, जहां हड़तालियों को धारा 120क के अंतर्गत इस आधार पर फंसाया गया हो कि यह षड्यंत्र है। लेकिन इस विषय पर मुझे अंग्रेजी कानून से कुछ समर्थन मिलता है। वह भी हड़ताल को षड्यंत्र के रूप में लेता है और मैं एकोलोसर द्वारा लिखित पुस्तक दि लीगल पोजीशन ऑफ ट्रेड यूनीयन्स से सदन को एक छोटा सा परिच्छेद पढ़कर सुनाना चाहता हूं। मैं पृष्ठ 76 से यह उद्धरण पढ़ता हूं :
इसलिए हड़तालें, मजदूरों की स्थितियों को बेहतर बनाने का सरल संयोजन हैं
और वे सामान्य विधि से अवैधानिक नहीं हैं। इंग्लैंड के कानून के अनुसार इस
विचार का कोई आधार नहीं है कि हड़तालें अपने आप में अवैधानिक हैं। यह
सच है कि इस संबंध में सामयिक उक्तियां मिल जाती हैं कि सामान्य विधि से
मजदूरों की स्थिति को बेहतर करने का संयोजन अवैधानिक है, पर निर्धारित
किए गए कानूनों को कभी अदालतों ने नहीं माना और प्रतिष्ठित न्यायाधीशों ने
उनके विरुद्ध विचार व्यक्त किए। सत्रहवीं-अठारहवीं शताब्दी के दौरान किसी
भी अदालत ने मजदूरों की स्थिति को बेहतर बनाने के संयोजन को सामान्य
विधि से प्रतिकूल नहीं माना और विधान अधिनियमों की किसी भी शृंखला ने
मजदूरों की स्थिति को बेहतर बनाने के संबंध में उनके प्रयासों, घोषणाओं,
उद्देश्यों या सामान्य विधि के प्रति उनके विश्वासों का प्रतिरोध नहीं किया। अगर
हम रैक्स वी. मौबे में ग्रौस. जे. द्वारा दिए गए प्रासंगिक विचार को मान लेते
हैं, तो तब तक पेश किए गए प्रावधान के समर्थन में कोई न्यायिक लेख नहीं
था, जब तक कि 1925 के संयोजन अधिनियम के द्वारा विधान-मंडल ने उन
समस्त संविधियों को समाप्त नहीं कर दिया था। हाल में ही, पहली बार आए
सामान्य विधि के परिणाम, आरंभिक तिथि से एक स्वीकृत सिद्धांत पर आधारित
हैं, जिन्हें बड़े संशय से देखा गया। 1824 से ही प्राधिकरण की शक्ति इस मत
के विरुद्ध रही है कि ‘हड़तालें अपने आप मे ंसंयोजित हैं’।
यह निर्णय का एक मुख्य हिस्सा है :
न वह गैर-कानूनी कार्य संपादन और न ही गैर-कानूनी ढंग से वैधानिक कार्य
संपादन करने के लिए है। इस संबंध में स्पष्ट कानून है कि मजदूरों को अपनी
सुरक्षा के लिए संगठित होने का अधिकार है। संगठन का प्रयोजन उन लाभों को