22. औद्योगिक विवाद विधेयक - Page 243

226 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

लेने से है, जिनके लिए वे कानूनन दावा कर सकते हैं। श्रम व शर्तों के संदर्भ

में निर्णय करने का अधिकार है, जिसका कोई प्रयोग कर सकता है। मैं इस मुद्दे पर बल देने की कोशिश कर रहा था :

और अकेले ही या एकाधिक व्यक्तियों से परस्पर सलाह करके संयुक्त रूप से

प्रयोग कर सकते हैं और अपनी पसंद की घोषणा वे एक साथ कर सकते हैं

और वैधानिक रूप से फिर वांछित शर्तें प्राप्त करने के लिए तात्कालिक प्रयोजन

के लिए कार्यवाही कर सकते हैं।

जरूरी नहीं कि हड़ताल जारी रखना गैर-कानूनी है और यदि कोई हड़ताल

ऐसा अनुबंध भंग होने पर की जाती है, जिसकी अवधि समाप्त हो चुकी हो तो,

ऐसी समाप्त हुई अवधि के बाद जो लोग नई शर्तों पर नया सेवा-अनुबंध करने

से इंकार करके हड़ताल जारी रखने में हड़ताली श्रमिकों की सहायता करते हैं,

उनका ऐसा करना कुछ भी गैर-कानूनी नहीं है। इसीलिए ये संगठन बने हैं।

मैं सदन का ध्यान इस विषय की ओर आकर्षित करना चाहता हूं, क्योंकि इसका भारतीय दंड संहिता की धारा 120क के साथ प्रत्यक्ष संबंध है। ‘जिसका परिणाम दूसरे को क्षति पहुंचाना हो वह अवैधानिक होगा, जबकि संगठन का उद्देश्य क्षति पहुंचाना हो’, ये शब्द हैं — ‘जब संगठन का उद्देश्य क्षति पहुंचाना हो।

और अगर क्षति हो जाती है, तो वह कार्य षड्यंत्र माना जाएगा। प्रत्येक मामले में जिस प्रश्न को तय करना है, वह यह है कि वैधानिक संगठनों के कारण वह क्षति कितनी है और संगठन कहां तक क्षति पहुंचाने के लिए कार्यरत है।’

इसलिए मेरा निवेदन यह है कि हड़तालों को धारा 120क के अंतर्गत लाने के लिए अभियोग को प्रमाणित करने हेतु यह आवश्यक होगा कि हड़ताल का उद्देश्य क्षति पहुंचाना था। अगर हड़ताल के परिणामस्वरूप मात्र क्षति पहुंचती है, तो इससे वह हड़ताल धारा 120क के अर्थानुसार अवैधानिक संगठन नहीं बन जाती है। इसलिए मेरा पहला दावा यह है कि यह विधेयक, हड़तालियों को दंडित करके मजदूरों को दासता की स्थिति में पहुंचाने के सिवाए और कुछ नहीं कर रहा है।

मेरे अनुसार इस विधेयक को वास्तव में ‘मजदूर की नागरिक स्वतंत्रता हनन विधेयक’ कहकर पुकारा जाना चाहिए। यह इसके लिए उचित शीर्षक होगा। कई लोगों का यह ख्याल है कि आखिरकार स्थगन केवल दो महीने का है, जब तक कि समझौते की प्रक्रिया समाप्त न हो। इसके बाद अगर मजदूर चाहें, तो उन्हें हड़ताल करने की स्वतंत्रता होगी। महोदय! मैं यह कहना चाहता हूं कि यह बहुत गलत

ख्याल होगा। मेरा दावा है कि इस विधेयक के प्रावधानों को जब कार्यान्वित किया जाएगा, तो इससे चिर स्थायी दासता आ जाएगी और मजदूर कभी भी हड़ताल नहीं कर पाएंगे। अब प्रावधानों की ओर देखा जाए। सर्वप्रथम, विधेयक में यह प्रावधान है कि जब विधेयक पर अमल शुरू हो जाएगा, तो कम से कम एक साल तक कोई