औद्योगिक विवाद विधेयक
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हड़ताल नहीं होगी, चाहे स्थितियां ऐसी हों कि कोई भी सही मजदूर उन्हें स्वीकार कर ले या चाहे वे ऐसी हों कि कोई भी गलत मजदूर उन्हें नहीं माने, एक साल के लिए तो पूर्ण दासता होगी। दूसरी अनुसूची में दर्ज शर्तों को मानने के लिए मजदूर बाध्य हैं। इस स्थिति से बचने का कोई रास्ता नहीं है। एक वर्ष खत्म हो जाने के बाद क्या होगा? होगा यह कि आपको नोटिस देना होगा, जिसके अनुसार एक निश्चित अवधि तक आप हड़ताल नहीं कर सकते हैं। फिर नोटिस देने के बाद उत्तर देने के लिए समय दिया जाता है। उत्तर देने के समय के दौरान आप हड़ताल नहीं कर सकते। फिर समझौते की प्रक्रिया शुरू होती है और अगर पार्टी भाग्यशाली है तथा समझदार भी है, तो हो सकता है कि वह दो महीने तक चले। लेकिन विधेयक में यह प्रावधान है कि अवधि चार महीने तक बढ़ सकती है। इसलिए मजदूरों की शिकायतों की तिथि से चार महीने और वास्तव में 25 दिनों तक — अगर मेरी गणना गलत हो, तो उसे ठीक कर दिया जाए, क्योंकि मैंने विस्तारपूर्वक नहीं देखा है — मजदूर कुछ न करें। वे बात न करें, वे भाषण न दें, वे न आयोजन करें, न कार्य — कुछ न करें। इस दौरान उन्हें समस्त गतिविधियों — किसी शब्द या भाषण या कृत्य तक के लिए दंडित किया जा सकेगा, अगर मान लिया जाए कि इस चार माह और 25 दिन के लंबे समय में कोई समझौता नहीं होता। मैं यह कहना चाहता हूं कि यदि अनिश्चय की लंबी अवधि बनी रहती है, तो फिर क्या होगा? समझौते की अवधि समाप्त हो जाने के बाद मजदूरों को हड़ताल करने के लिए केवल दो महीने मिलेंगे। मुझे नहीं पता कि इस विधेयक के प्रस्तावक मेरे माननीय मित्र क्या सोचते हैं कि मजदूरों की विघटित शक्ति को सक्रिय करने और उन्हें संगठित होने के वास्ते दो महीने का समय पर्याप्त है। मैं श्रमिक क्षेत्र का एक सक्रिय कार्यकर्ता रह चुका हूं। मैं यह नहीं कह सकता कि मैं मौके पर काम करने वाला आदमी हूं और इसलिए यह नहीं जानता कि जो व्यक्ति हड़ताल करने के लिए मजदूरों को संगठित करता है, उसे किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। लेकिन बंबई नगर के प्रेषक के रूप में हुए अनुभवों के आधार पर स्थिति को देखते हुए, मुझे यह कहने में जरा सी भी हिचक नहीं है कि चार महीने 25 दिनों के लिए निराशाजनक स्थिति में फंसे श्रमिकों के निकाय के लिए अपनी शक्ति को हड़ताल के लिए गतिशील बनाने के वास्ते दो महीने की अवधि अत्यधिक कम है। अगर वे दो महीने में हड़ताल नहीं करते, तो क्या होगा? उन्हें स्थिति को स्वीकारने के लिए कानून का पालन करना पड़ेगा। अगर वे फिर सिर उठाते हैं और नई शिकायतें ढूंढ लाते हैं, तो कानून के अनुसार उन्हें फिर चार महीने और 25 दिनों तक इंतजार करना पड़ेगा और समझौता प्रक्रिया जारी रखनी होगी। रुको और देखो हम क्या करते हैं — चार महीने और 25 दिनों तक रुको और देखो। फिर भी चार महीने व 25 दिनों के अंत तक कुछ नहीं