औद्योगिक विवाद विधेयक
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हड़ताल को एक अपराध माना जाएगा। इसमें कोई शक नहीं कि ऐसी हड़ताल
असुविधाजनक है और हमारी आम आवश्यकताओं में खलल डालती है, लेकिन
यह दावा करना बहुत बड़ी बात होगी कि अगर व्यक्तियों का कोई समूह हमारी
आवश्यकताओं में सहायता करने से मना कर देता है, विशेषकर जब हड़ताली
यह महसूस करें कि ये आवश्यकताएं व सुविधाएं केवल तभी जारी रखी जा
सकती हैं, जब मजदूरों की हैसियत खत्म की जा रही हो या ये उनको निर्धनता
में धकेल देंगी, तो उस मजदूर समूह को अपराधी बताने का दावा गलत है। क्या
गंभीरतापूर्वक यह दावा किया जा सकता है कि फ्रंटियर मेल और उसी तरह
की आरामदायक सेवाएं समाज के लिए इतनी अत्यावश्यक हैं कि उन सेवाओं
में हड़तालें अवैध मानी जाएं?
मैं विपक्ष में बैठे अपने माननीय मित्रों को आखिरी कुछ पंक्तियां सुनाता हूं। उद्धरण का अगला अंश है :
विधान-मंडल के लिए एक इतने अन्यायपूर्ण मत को अनुमोदित करना जैसा कि
खंड 15 में सम्मिलित है, संसार के सामने यह घोषित करता है कि मानव जाति
के अधिकांश हिस्से के मजदूरों को क्रीतदास बने रहना होगा और वे केवल जेल
में जाने की पीड़ा से ही हड़ताल करेंगे। हम अपने देश की औद्योगिक प्रगति
को बढ़ाने के लिए बहुत तत्पर हैं, लेकिन इस खंड में प्रस्तावित जबरदस्ती के
तरीकों के द्वारा नहीं। हम मानते हैं कि पानी का वितरण, बिजली व स्वच्छता,
समाज के लिए पूर्णतया आवश्यक है तथा इन सेवाओं में होने वाली किसी भी
हड़ताल को कानूनी ढंग से निरुत्साहित किया जाना चाहिए, लेकिन इसलिए
नहीं कि ये ‘जनोपयोगी सेवाएं हैं, बल्कि इसलिए कि ये सामाजिक सुरक्षा की
सेवाएं’ हैं और जैसा कि किसी भी व्यक्ति को समाज के अस्तित्व के विरुद्ध
रुचि रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती, हम भी किसी ऐसे कानून के विरोधी
नहीं हैं जो ‘सामाजिक सुरक्षा सेवाओं’ के उद्देश्य से हड़ताल को अवैध घोषित
करता हो।
महोदय! उस समय कांग्रेस के सदस्यों ने यह नीति अपनाई थी। मैं श्री कुंजरू द्वारा संलग्न विमत के नोट के एक अंश को भी पढ़ना चाहता हूं। वह उदारवादी हैं और मैं इस पर जोर देता हूं ताकि आप यह समझ सकें कि एक नरम व्यक्ति ने जो कांग्रेस के सिद्धांत व नीतियों का प्रचारक नहीं है, 1929 में क्या कहा होगा। उन्होंने कहा था :
खंड 15 जो कि जनोपयोगी सेवाओं में हड़तालों के बारे में है, पूर्व सूचना दिए
बिना सेवा की शर्तों के उल्लंघन से हुई हड़ताल को अवैध मानता है। अगर
केवल ऐसी सेवाओं में अचानक हुई हड़तालों को दंडित किया जाता है जहां
पर्याप्त सूचना दिए बिना काम रोकना मनुष्य के स्वास्थ्य व जीवन के लिए