232 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
खतरनाक होता हो, वहां ऐसे कृत्यों के मामले सैद्धांतिक रूप से स्पष्ट होंगे,
चाहे कानून को लागू करना कितना ही मुश्किल क्यों न हो। लेकिन प्रवर समिति
द्वारा उस प्रावधान के विलोपन के बावजूद, जिसने सरकार को किसी भी सेवा
को जनोपयोगी सेवा घोषित करने का विवेकाधिकार दिया था, जनोपयोगी सेवा
की परिभाषा में अभी भी ऐसी सेवाएं सम्मिलित हैं, जिनमें अकस्मात हड़तालों
से चाहे कोई भी असुविधा क्यों न हो, जीवन का खतरा नहीं हो सकता। किसी
भी औद्योगिक संस्थान में चाहे कितनी भी अकस्मात हड़ताल क्यों न हों, उन्हें
दंड देने का कोई आधार नहीं है, जहां वे समाज की सुरक्षा को प्रभावित नहीं
करती हैं। सेवाओं में समाज के अस्तित्व को प्रभावित करने वाली आकस्मिक
हड़तालों का समाधान प्रांतों में किया गया है। हड़तालों के अलावा अगर अनुबंध
का उल्लंघन किया गया है तो उस पर भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत सख्ती
से विचार किया जाए।...
यह श्री कुंजरू का दृष्टिकोण था। मैं इस प्रस्ताव से सहमत हूं कि बिना नोटिस की हड़ताल के अधिकार को नियंत्रित करना चाहिए, परंतु यह उन सेवाओं के मामले में नियंत्रित होना चाहिए जो जनोपयोगी सेवाएं नहीं हैं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा की सेवाएं हैं। महोदय! यह अंग्रेजी विधान के समान है। मैं इस संदर्भ में 1920 के आपातकालीन शक्तियों के अधिनियम की ओर सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। यह युद्ध समाप्ति के एक या दो वर्ष पश्चात् ब्रिटिश संसद ने पारित किया था। वहां भी आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए सरकार को नियम बनाने की शक्ति दी गई थी। मैं अधिनियम से सिर्फ एक या दो धाराएं पढूंगा। धारा 1 के अनुसार :
अगर किसी भी समय महामहिम को यह लगे कि ऐसी कोई कार्यवाही की गई है
या उस प्रकार से किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के निकाय द्वारा तुरंत इतने व्यापक
रूप में धमकी दी गई है, जिससे कि यह समझा जा सके कि उससे आपूर्ति व
वितरण में गड़बड़ी हो सकती है . . .
मैं इन शब्दों की ओर सदन का ध्यान दिलाना चाहता हूं :
भोजन, पानी, ईंधन, बिजली या वाहन के मामले में समाज या उसके किसी एक
हिस्से को आवश्यक सेवाओं से वंचित करना।...
महामहिम, घोषणा के द्वारा यह ऐलान कर सकते हैं कि आपात स्थिति बनी हुई है। फिर धारा 2 के अनुसार :
जब आपात स्थिति की घोषणा की जाती है और जब तक घोषणा लागू रहती है,
समाज के लिए जीवनोपयोगी आवश्यक सुविधाओं की सुरक्षा के वास्ते महामहिम
द्वारा नियमों का बनाया जाना विधि-समस्त होगा और ये नियम किसी . . .
सरकार पर लागू होंगे . . . ऐसे अधिकार और कर्तव्य जिन्हें महामहिम आवश्यक