औद्योगिक विवाद विधेयक
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समझें . . .
यह बात ध्यान में रखनी होगी कि इसमें वे सब मामले शामिल होंगे जो जनता की सुरक्षा व समाज के लिए आवश्यक हैं। यह दृष्टिकोण सदैव अपनाया गया है कि अगर आप हड़ताल करने के अधिकार पर प्रतिबंध लगाना चाहते हैं और उसे अवैध बनाना चाहते हैं, तो यह उन्हीं सेवाओं के संबंध में करें, जिन पर समाज मूलतया निर्भर करता है। अब, यह स्वाभाविक है कि यह विधेयक प्रत्येक व्यापार व उद्योग पर लागू होता है। मैं मजाक उड़ाने के उद्देश्य से कुछ नहीं कहना चाहता, पर मैं यह कहकर अपने मुद्दे को स्पष्ट करना चाहता हूं कि मान लिया जाए कि कल भारतीय स्त्री — मैं आशा करता हूं वे ऐसा नहीं करेंगी — अपने होंठ रंगने का फैशन अपना लेती हैं और कई निर्माता जिन्हें पैसा कमाने की गंध आ जाए, उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए लिपस्टिक बनाने का उद्योग शुरू कर दें और अगर मजदूर हड़ताल पर चले जाते हैं, तो यह अधिनियम उनके सिर पर नंगी तलवार की तरह लटक जाएगा। क्या कोई भी गंभीरतापूर्वक यह कह सकता है कि लिपस्टिक उद्योग जीवन के लिए आवश्यक है और यह कि हड़ताल करने का अधिकार समाप्त कर देना चाहिए क्योंकि कई स्त्रियां अपने होठों को रंगने से वंचित रह जाएंगी? महोदय! इस सरकार ने केवल सामाजिक सुरक्षा सेवाओं में होने वाली हड़तालों पर दंडात्मक कार्रवाई को सीमित करने संबंधी बोर्ड के 1929 के दृष्टिकोण को ही नजरअंदाज नहीं किया, बल्कि 1929 के अधिनियम के प्रावधानों से भी आगे जाकर नौकरशाही के रवैए का तिरस्कार किया है।
नौकरशाही के पास कम से कम यह समझने की जिम्मेदारी तो थी कि हड़ताल करने का अधिकार इतना महत्त्वपूर्ण है कि इसे सार्वजनिक सुरक्षा के दायरे से बाहर दंडनीय न बनाया जाए। मैं इस विधेयक को दोहराना चाहता हूं, जो लिपस्टिक उद्योग में हड़ताल को दंडनीय बना देगा।
यह सब किसलिए है? इन मुकदमों और अधिकारों की भरमार से हमें क्या लाभ मिल सकता है, जिन्हें वे इन गरीब मजदूरों पर लादने की कोशिश कर रहे हैं? इसका परिणाम, जैसा कि मैं देखता हूं, यह होगा कि किसी सज्जन की मेज के पास चार महीने और 25 दिनों तक इंतजार करना पड़ेगा, जिसे यह विधेयक मध्यस्थ कहता है। इसके अलावा मुझे इसमें कुछ नहीं दिखाई देता। माननीय गृह मंत्री ने बताया कि इस विधेयक के प्रस्तावित होने का एक कारण यह था कि राज्य अपने कंधों पर सामूहिक सौदेबाजी की जिम्मेदारी ले रहा था। मेरे ख्याल से उन्होंने इसी संबंध में कुछ कहा है। अगर इस संबंध में मेरा कथन गलत है तो मुझे आशा है कि वे उसे सही कर देंगे।
माननीय श्री के.एम. मुंशी : नहीं, उसे सामूहिक सौदेबाजी की जिम्मेदारी लेने के लिए नहीं, बल्कि उसे विनियमित करने के लिए कहा है।