1. बजट पर चर्चा - Page 26

बजट पर चर्चा

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पंजाब 10.40 - 29.41 - बर्मा 34.36 - 6.44 - बिहार और उड़ीसा 5.89 - 44.66 - मध्य प्रांत 6.24 - 18.15 - आसाम 8.24 - 12.75 -

महोदय! यदि हम इन आंकड़ों पर ध्यान दें, तो हमें क्या ज्ञात होता है? मुझे यह जानकर खेद होता है, और इस सदन के हर व्यक्ति को भी अवश्य ही दुःख होगा कि आरक्षित और हस्तांतरित विभागों के आनुपातिक खर्च के मामले में बंबई जैसे महत्त्वपूर्ण प्रांत का स्थान बहुत नीचे है। यहां तक कि बर्मा जिसकी व्यवस्था बहुत ही

खराब है, इस संबंध में बंबई से ऊपर है। महोदय! इसलिए मेरी यह धारणा है कि इसमें जरूर कोई बड़ा घोटाला है। निश्चय ही इस तरीके से बंबई जैसी महत्त्वपूर्ण प्रेसिडेंसी की वित्तीय व्यवस्था का संचालन नहीं किया जाना चाहिए। अच्छा होता अगर माननीय वित्त सदस्य ने हस्तांतरित विभागों पर जितना ध्यान दिया है, उससे अधिक ध्यान दिया होता। आंकड़ों से स्पष्ट है कि आरक्षित विभागों को अभावग्रस्त से भी बदतर स्थिति में लाकर छोड़ दिया गया है। महोदय! माननीय वित्त सदस्य के होने का क्या लाभ है, यदि वह प्रेसिडेंसी की जनता की आकांक्षाओं को पूरा नहीं करते हैं? सभी वर्ग समग्र रूप से प्रगति की मांग कर रहे हैं। माननीय वित्त सदस्य जानते ही होंगे कि यह मांग कितनी जोरदार है। लेकिन दुर्भाग्य से अभी तक उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया, जिससे कि भविष्य में उनसे कुछ आशा की जा सके।

महोदय! केवल वित्त व्यवस्था ही गड़बड़ नहीं है, बल्कि मेरा तो यह मानना है कि इस प्रेसिडेंसी की आर्थिक दशा वास्तव में बहुत गंभीर है। यदि आप वर्ष 1921-22 से लेकर आज तक हर साल की आर्थिक स्थिति की समीक्षा करें, तो आप पाएंगे कि हर साल बचत में इस हद तक गिरावट होती रही है कि बचत के बजट प्रस्तुत करने के बजाए, हम अपनी सारी बचत खर्च कर चुके हैं और अब हम उस स्थिति में पहुंच गए हैं कि बजट में लगातार घाटा दिखा रहे हैं। वर्ष 1922-23 में बचत 64 लाख रुपए थी, वर्ष 1923-24 में यह घटकर 29.39 लाख रुपए तक आ गई। वर्ष 1925-26 में 91 लाख रुपए का घाटा रहा और हम जानते हैं कि तब से स्थिति क्या है? महोदय! इन आंकड़ों से आप देख रहे हैं कि इस प्रेसिडेंसी की आर्थिक स्थिति वर्ष-प्रतिवर्ष बिगड़ती चली जा रही है और मेरा कहना है कि सरकार द्वारा किए गए वायदों को लेकर भविष्य में स्थिति बहुत गंभीर होगी। महोदय! आप जानते हैं कि कर्जे की भी जल्दी ही पूरी अदायगी करनी है। उन कर्जों की अदायगी के लिए भी कुछ व्यवस्था करनी पड़ेगी और इसके परिणामस्वरूप प्रेसिडेंसी के खाली खजाने पर बहुत बड़ा बोझ पड़ने वाला है। महोदय! परिषद और सरकार सबके लिए अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा के प्रति वचनबद्ध हैं। परिषद और सरकार ने मद्यनिषेध की नीति को लागू करने का भी वायदा किया है। इन तीनों ही मदों का प्रेसिडेंसी की वित्त व्यवस्था