औद्योगिक विवाद विधेयक
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पर प्रतिबंध लगाया जाए, लेकिन उन्होंने उनसे सहयोग करने से भी इंकार कर दिया। (एक माननीय सदस्यः नहीं, नहीं।) चूंकि चुनौती दी गई है, इसलिए मैं उनके भाषण का एक अंश पढूंगा। बोंबे लेजिस्लेटिव काउंसिल डिबेट्स, खंड 40, पृष्ठ 180 पर उन्होंने यह कहा था :
मैं धरने से संबंधित एक मामले को उद्धृत करना चाहता हूं। खंड 15 में आप
देखेंगे कि धरना रोकने के लिए समझौते की प्रक्रिया के बारे में एक उपबंध है
और किसी व्यक्ति को उत्पीडि़त करने पर भी प्रतिबंध है, जिससे उन्हें समझौते
की प्रक्रिया के दौरान ऐसे कृत्य या कारोबार से संबंधित ‘अपना दैनिक कार्य
या व्यवसाय करने’ से रोका जा सके। अन्य शब्दों में, समझौते की प्रक्रिया शुरू
होने के पश्चात् सरकार का यह इरादा था कि मिल में धरने की स्वीकृति नहीं
देनी चाहिए। यहां तक कि अगर कोई हड़ताल पहले ही चल रही है तो यह
इरादा था कि मिल के परिसर में चलने वाले धरनों को रोक दिया जाए। अगर
दोनों पक्ष फैसले का इरादा रखते हैं, तो यह माना जाएगा कि यही वांछनीय
तरीका है। दूसरी तरफ, कर्मचारियों द्वारा मिल की तालाबंदी करने पर उनके
विरुद्ध कोई निषेध नहीं है। कई क्षेत्रों में यह माना गया कि धरना देने का
अधिकार एक पवित्र अधिकार की तरह है, इसलिए सावधानीपूर्वक विचार करने
के बाद, हमने खंड 15 में उल्लिखित शब्दों को छोड़ देने के लिए एक संशोधन
प्रस्तावित करने का निश्चय किया है, इससे मिल के फाटक के सामने धरना
देने पर रोक लगाई जा सकेगी।
यह स्थिति उन्होंने अपनाई थी और, महोदय! मैं गंभीरतापूर्वक यह दावा करता हूं कि अगर हड़ताली को समझौता करने की छूट हो, तो ज्यादा उचित होगा। मेरे
ख्याल से यह ऐसा पहलू है, जिस पर बिल्कुल भी विचार नहीं किया गया है। एक मालिक क्यों समझौता करेगा, जबकि वह जानता है कि उसके पास अपनी शक्तियों को सक्रिय करने के लिए चार महीने 25 दिन का समय है और वह यह जानता है कि चार महीने 25 दिन के अंदर कोई भी मजदूर सक्रिय नहीं हो सकता, कोई मजदूर तैयार नहीं हो सकता और जबकि वह यह भी जानता है कि जिस अवधि के दौरान हड़ताल होनी है, उसमें केवल दो महीने के भीतर ही हड़ताल कर सकते हैं। वहां कोई लाभ नहीं है, कोई दबाव नहीं है, मालिक की कोई रुचि नहीं है। ऐसी परिस्थितियों में, शर्तों पर आते हुए अगर विधेयक के माननीय प्रस्तावक का यह विचार और उद्देश्य हो कि इस समझौते की कार्य-प्रणाली फले-फूले और किसी ऐसी ठोस अच्छाई के रूप में सामने आए जो दोनों पक्षों को मंजूर हो, तब मैं निवेदन करूंगा कि उचित प्रक्रिया यही है कि माननीय रॉबर्ट बेल द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया को लागू किया जाए, यानि कि यह हड़ताल होने दी जाए। दूसरे शब्दों में, वर्तमान विधेयक के प्रावधानों को कायम रखा जाए। महोदय! लेकिन यहां सरकार उस