236 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
दृष्टिकोण को अपनाने के लिए तैयार नहीं है, जो कि अधिकारियों द्वारा अपनाया गया है। अधिकारियों द्वारा अपनाया गया दृष्टिकोण यह था कि हड़ताल को रोकने की आवश्यकता नहीं है, जबकि एक लोकप्रिय सरकार जो श्रमिकों के वोट पर चुने जाने का दावा करती है, उस दृष्टिकोण का समर्थन नहीं करती, जो उसके अधिकारियों द्वारा अपनाया गया है। उसकी न तो मजदूर में रुचि है, न ही देश के कल्याण में। यदि यही प्रजातंत्र है, तो हो, परंतु मैं इसे प्रजातंत्र नहीं कहूंगा — वह प्रजातंत्र जो कामकाजी वर्ग को दास बना लेता है, जिसमें एक वर्ग शिक्षा से विहीन है, जीवन की जरूरतों की पूर्ति से रहित है, संगठन की किसी भी शक्ति से रहित है, बुद्धि मत्ता से रहित है, मैं निवेदन करता हूं कि यह प्रजातंत्र नहीं है, बल्कि प्रजातंत्र का उपहास है। विधेयक के मुख्य प्रावधानों के लिए इतनी बात काफी है।
महोदय! इस विधेयक के कई अन्य प्रावधान भी हैं, जिनका मैं उल्लेख करना चाहता हूं। ये प्रावधान खंड 4 से लेकर खंड 20 में सम्मिलित हैं। यदि इन खंडों की ओर देखें, तो ये चार विभिन्न धाराओं का भी उल्लेख करते हैं। वे अर्हक संघ, पंजीकृत संघ, प्रतिनिधित्व संघ की विभिन्न धाराओं का भी उल्लेख करते हैं। महोदय! मुझे इस विधेयक के पिछले प्रारूप को पढ़ने का अवसर प्राप्त है। पिछले प्रारूप में भिन्न वाग्जाल है, जैसे कि सपाट संघ, लंबवत संघ, तिरछा संघ, लंबा संघ। मुझे
खुशी है कि इस वाग्जाल को हटा दिया गया है। मैं कभी भी गणित में होशियार न था, और बहुत थोड़ा सा ही रेखा गणित जानता हूं। इस वाग्जाल के बदलने से जो थोड़ी राहत मिली है उसके लिए मैं इस विधेयक के प्रस्तावक और उसे तैयार करने वालों को धन्यवाद देना उचित समझता हूं। दूसरी बात जिसका इन खंडों में उल्लेख है, वे संघों के विभिन्न वर्गों के पंजीकरण से संबंधित अवधि और शर्तों एवं प्रक्रियाओं से संबंधित है। तीसरी बात इन मान्यताप्राप्त संघों या पंजीकृत संघों का प्रतिनिधित्व संघ के रूप में घोषित करने की अवधि और शर्तों एवं प्रक्रियाओं के बारे में है और चौथी बात, प्रतिनिधित्व संघ के रूप में संघ के पंजीकरण के लिए शर्तों और उसकी घोषणा को रद्द करने के संबंध में है। महोदय! मैं यह जानकर काफी भ्रमित हुआ हूं कि इस विधेयक के मुख्य प्रावधानों के साथ इन खंडों का क्या व्यावहारिक संबंध है? विधेयक के मुख्य प्रावधान हैं — अनिवार्य समझौता और समझौते की प्रक्रिया के दौरान हड़तालों पर सजा। मेरे ख्याल से इन दो विषयों से संबंधित खंडों और अन्य
खंडों के बीच कोई मूलभूत संबंध नहीं है, जो कि विधेयक के मुख्य उद्देश्य हैं।
विधेयक के शीर्षक की बात करते हुए मुझे ऐसा लगता है कि उसके उद्देश्य को प्रकट करने के बजाए छुपाया गया है। विधेयक में एक शीर्षक है जिसके अनुसार — ‘समझौते और मध्यस्थ द्वारा औद्योगिक विवादों और अन्य उद्देश्यों के लिए शांतिपूर्ण व सौहार्दपूर्ण समाधान को बढ़ावा देने के प्रावधान हेतु एक विधेयक।’ महोदय! इसके अन्य उद्देश्य क्या हैं और वे विधेयक के शीर्षक में क्यों नहीं स्पष्ट किए गए हैं?