238 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
न कि स्वतंत्र व्यक्तियों का संघ। मुझे लगता है कि शब्द ‘स्वीकृति’ व शब्द ‘मान्यता’ का जो इन्होंने प्रयोग किया है, वह बहुत अनुचित है। इसकी उचित परिभाषा होगी ‘कर्मचारियों द्वारा स्वीकृत संघ’ जैसे कि हमने साधारण शब्द में देखा, जिसकी हमें मंजूरी देने के लिए कहा गया था।
महोदय! अब जो बात मैं समझ नहीं पा रहा हूं और जिसे मेरे माननीय मित्र मुझे समझाएंगे, वह यह है कि उन्होंने इस विधेयक में किसी संघ को प्रतिनिधित्व का अधिकार देने के लिए पंजीकरण की ऐसी शर्तें क्यों रखी हैं। मैं विधेयक में इन प्रावधानों को समझने में बहुत कठिनाई महसूस कर रहा हूं। महोदय! प्रावधान का वर्तमान स्वरूप यह है कि 1926 में भारत सरकार ने श्रमिक संघ अधिनियम पारित किया था, जिसे बाद में श्रमिक संघ अधिनियम कहा गया। यह विधेयक उस अधिनियम को रद्द नहीं करता है। वस्तुतः, वह अधिनियम कायम है और आगे यह विधेयक इस बात पर जोर देता है कि इसके प्रावधानों के अंतर्गत किसी संघ का पंजीकरण होने से पहले उसका अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण होना आवश्यक है। इस विधेयक में दी गई संघ की परिभाषा से यह स्पष्ट है। मैं भी सदन को बताऊंगा कि ऐसा क्यों किया गया। मुझे लगता है इसके पीछे कोई इरादा है। इसलिए स्थिति यह है कि किसी संघ के पास दोहरा पंजीकरण होना चाहिए। एक तो 1926 के अधिनियम के तहत पंजीकरण तथा दूसरा नए अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण। मुझे ऐसा लगता है कि अगर मैं उन लाभों का उल्लेख करूं जो 1926 के अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण संघ को मिले हैं, तो बेहतर होगा कि हम यह जान सकें कि यह विधेयक और अधिक क्या देता है या क्या वह ऐसा कुछ है जिसे विधेयक छीन लेता है। 1926 के अधिनियम के अंतर्गत संघ के पंजीकरण के ये परिणाम हैं। संघ मुकदमा दायर करने और नालिश करवाने के अधिकार के साथ निगम बन जाता है। निगम के रूप में, उसके पास निश्चित रूप से अपने सदस्यों का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार है, अन्यथा एक निगम के अस्तित्व का कोई अर्थ नहीं है। दूसरे, जैसा कि सदन महसूस करेगा, भारत सरकार के 1935 के अधिनियम के अंतर्गत ऐसा प्रावधान है कि 1926 के अधिनियम के तहत पंजीकृत संघ राजनैतिक प्रतिनिधित्व का अधिकार प्राप्त कर लेता है, यानी कि अधिनियम 1926 के अंतर्गत पंजीकृत संघ इस सदन के लिए सदस्य चुन सकता है और इस सदन में ऐसे माननीय सदस्य हैं, जो इस तथ्य की गवाही देंगे। उसी तरह 1926 के अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत संघ के सदस्यों के पास बंबई नगरपालिका में प्रतिनिधि भेजने का अधिकार है। महोदय! अब यह प्रश्न उठता है कि अगर 1926 के अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण संघ को प्रतिनिधित्व का अधिकार मिलता है, तो इस विधेयक के अंतर्गत और पंजीकरण कराने की क्या आवश्यकता है? अगर 1926 के अधिनियम के तहत पंजीकृत संघ, इस सदन में बोलने के लिए और इस सदन में मत देने के लिए संपूर्ण मजदूर निकाय के सदस्यों को,