242 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
है, जिसमें इसके आंकड़े हैं और विश्लेषण करने पर मुझे पता चला कि ऐसी स्थिति अहमदाबाद में थी। मैं केवल कपड़ा उद्योग को ले रहा हूं। अहमदाबाद कपड़ा उद्योग में कर्मचारियों की कुल संख्या 90,000 है। यह उन कर्मचारियों की कुल संख्या है, जो संघ में सम्मिलित हैं। मजूर-महाजन, जैसा कि सब जानते हैं पांच विभिन्न संघों का संघ है और इसकी कुल संख्या 22,000 है। यह संख्या मई 1938 में थी। महोदय! इसका कुल योग; मैं कमजोर गणितज्ञ हूं, अगर कोई मेरे आंकड़ों का संशोधन करे, तो मुझे ठीक कर दिया जाए — इसका कुल योग — मेरे अनुसार 21 प्रतिशत है; यानी संघ की सदस्यता कपड़ा उद्योग में कार्यरत कर्मचारियों की कुल संख्या का 21 प्रतिशत है। इस परीक्षण को अहमदाबाद पर भी लागू करते हुए, मैं कहता हूं, क्या कोई कह सकता है कि अगर हमें आज पंजीकरण के लिए आवेदन देना पड़े, तो क्या अहमदाबाद मजूर-महाजन, मालिक की स्वीकृति के बिना ऐसा कर सकता है? नहीं।
(सभा मध्यावकाश के बाद ढाई बजे पुनः समवेत होगी)
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : माननीय अध्यक्ष महोदय! मध्यावकाश से पहले मैं इस बात पर जोर देने की कोशिश कर रहा था कि इस विधेयक में निहित शर्तों के अंतर्गत इस देश में किसी स्वतंत्र संघ के विकसित होने की संभावना नहीं है और जो मैं कहना चाहता हूं उसका उल्लेख मैंने अहमदाबाद मिल मजदूर संघ की स्थिति का हवाला देते हुए प्रस्तुत किया है और यह दर्शाया है कि अहमदाबाद में विद्यमान अति अनुकूल स्थितियों के होते हुए भी मजूर-महाजन के लिए वहां अपना स्वतंत्र संघ बनाना संभव नहीं, जबकि वह मालिक का अनुमोदन प्राप्त किए बिना अधिनियम के अंतर्गत मान्यता पाने का हकदार है। महोदय! यह सचमुच बहुत ही दुष्कर स्थिति है, जिसे कि इंग्लैंड जैसे औद्योगिक रूप से संगठित देश में भी महसूस करना संभव नहीं होगा। दुर्भाग्यवश, सभी प्राप्य पुस्तकों में हमें देश में विभिन्न संघों की कुल सदस्यता के आंकड़ों का सेट मिलता है, लेकिन हमें इसके साथ कहीं भी ऐसे आंकड़े नहीं मिले जो देश में विभिन्न उद्योगों में कार्यरत व्यक्तियों की कुल संख्या दर्शाते हों। परिणामतः यह जान लेना आसान नहीं कि इंग्लैंड में कर्मचारियों का कुल प्रतिशत कितना है, जिन्हें देश में संघों का सदस्य कहा जा सके। लेकिन यहां मुझे थ्री वाल्टर सिटराइन द्वारा लिखित एवं 1926 में प्रकाशित पुस्तक का समर्थन प्राप्त है। इंग्लैंड में श्रमिक आंदोलन से परिचित प्रत्येक व्यक्ति को पता होगा कि उसकी श्रमिक आंदोलन में एक महत्त्वपूर्ण स्थिति है और इसलिए जिस मामले पर हम विचार कर रहे हैं, उसमें उनकी पुस्तक को एक प्रामाणिक दस्तावेज की तरह लिया जा सकता है। उन्होंने दिखाया है कि दुर्भाग्यवश वर्ष 1924 के अंतिम समय में नए आंकड़े नहीं थे। इंग्लैंड में स्थिति यह थी कि विभिन्न उद्योगों में कार्यरत व्यक्तियों की कुल संख्या एक करोड़ अस्सी लाख थी, जबकि संघों के स्त्री-पुरुष सदस्यों की