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औद्योगिक विवाद विधेयक

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संख्या केवल 55,31,000 थी। इसका मतलब है कि यह निश्चित रूप से लगभग 30 प्रतिशत से अधिक नहीं थी। अब, अगर इंग्लैंड जैसे देश में ऐसी स्थिति है, जहां मजदूर बहुत ही अच्छी तरह से संगठित हैं और उद्योग बड़ी तादात में फैले हुए हैं, तो हम भारत जैसे देश में क्या उम्मीद कर सकते हैं? इसलिए मेरा निवेदन है कि विधेयक में बताई गई शर्तें बहुत असंभव शर्तें हैं और अगले 10 या 20 वर्षों तक की स्थिति को देखते हुए कोई भी मजदूर संगठन अपने आपको इतना मजबूत नहीं बना सकेगा कि अपनी सदस्यता सूची में 51 प्रतिशत श्रमिकों को दिखा सके। परिणामतः इसका निर्विवाद रूप से यह निष्कर्ष रहा कि हड़ताल में समझौता प्रक्रियाओं में जिस प्रकार का मजदूर संघ मजदूरों का प्रतिनिधित्व करेगा, वह कुछ और नहीं होगा, बल्कि मालिकों से मान्यता प्राप्त उनका गुलाम संघ होगा।

महोदय! मैं अब दो अन्य अति महत्त्वपूर्ण प्रश्नों की ओर सदन का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं — पहला प्रश्न यह है कि भारत श्रमिक संघों के विकास पर विधेयक का क्या प्रभाव पड़ेगा? उस दृष्टिकोण से मैं निवेदन करता हूं कि विधेयक का अति महत्त्वपूर्ण खंड 8, उप-खंड (क) है। अब इस खंड में ऐसा एक सिद्धांत प्रतिपादित किया गया है, जिसे मैं असामान्य प्रकार का सिद्ध करने का प्रयास करूंगा। इस खंड के अनुसार ‘किसी उद्योग या व्यवसाय के संदर्भ में, जैसा भी मामला हो, रजिस्ट्रार किसी स्थानीय क्षेत्र में एक संघ से ज्यादा का पंजीकरण नहीं करेगा।’ दूसरे शब्दों में, विधेयक में कर्मचारियों से यह कहने का प्रावधान है कि अगर वे एक श्रमिक संघ में संगठित होना चाहते हैं, तो वे एक उद्योग या व्यवसाय में केवल एक ही संघ बना सकते हैं। वह कर्मचारियों को बताता है कि अगर वे एक श्रमिक संघ में संगठित होना चाहते हैं, तो किसी निश्चित परिभाषित स्थानीय क्षेत्र में एक उद्योग या व्यवसाय में वे केवल एक ही संघ बना सकते हैं। महोदय! अब मेरा दावा यह है कि विधेयक में एक प्रावधान है, जो मेरे विश्वास के मुताबिक इस देश में संघों की संख्या बढ़ने से रोकेगा। सर्वप्रथम, मैं इस विधेयक के प्रस्तावक से यह जानना चाहता हूं कि क्या विश्व के किसी अन्य हिस्से में यह सिद्धांत लागू होता है? महोदय! अब जहां तक ब्रिटेन के श्रमिक संगठनों की स्थिति का मेरे द्वारा किए गए अध्ययन का सवाल है, मैं एक व्यक्ति की प्रामाणिकता को उद्धृत करने को तैयार हूं, जो इस क्षेत्र में यह प्रमाणित करने में पूर्णतः सक्षम है कि निश्चित रूप से ब्रिटेन के कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। वस्तुतः अंग्रेजी कानून में श्रमिकों द्वारा संगठित होने के लिए किसी भी तरीके का अपनाना उन पर छोड़ दिया गया है। वहां ऐसा कोई नियम नहीं है कि संघ किसी एक उद्योग और किसी एक व्यवसाय तक ही सीमित रहे और न ही ऐसा कोई कानून है कि संघ किसी एक मामले को ले। इस मुद्दे पर मैं सदन का ध्यान शेविड्डन और मायरडिन ईवान्स की हाल ही में प्रकाशित पुस्तक द एम्पलायमेंट एक्सचेंज सर्विस ऑफ ग्रेट ब्रिटेन के एक अंश की ओर दिलाना चाहता