10 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
पर बहुत भारी बोझ पड़ेगा और मैं नहीं समझता कि सरकार का कोई भी माननीय सदस्य इन तीनों ही मदों को क्रियान्वित करने के संबंध में अपनी असहमति व्यक्त करे। हमारी वित्त व्यवस्था वर्ष प्रतिवर्ष इन तीनों मदों को शामिल किए बिना ही खराब होती जा रही है, तो मैं कल्पना ही नहीं कर सकता कि इन तीनों मदों को क्रियान्वित करने पर क्या स्थिति होगी? इस पूरी स्थिति में मुझे सबसे ज्यादा आश्चर्यजनक यह लगता है कि इन सब बातों से माननीय वित्त सदस्य को कोई परेशानी नहीं है। इस बात का वह कभी इज़हार नहीं करते हैं कि उन्हें प्रतिबद्धताओं का अहसास है। उनके बजट वक्तव्य से यह नहीं लगता है कि वह इन दायित्वों के प्रति जागरूक हैं। मेरे विचार में वह केवल एक काम चलाऊ नीति का ही पालन कर रहे हैं, जिसमें आज के अलावा कल की कोई चिंता नहीं है। उनके पास सामान्य नीति की ऐसी कोई रूपरेखा भी नहीं है, जिससे भविष्य के संकटों से निबटा जा सके। ‘मेरे बाद प्रलय ही’, उनका वेद वाक्य है। वह केवल बजट के घाटे को ही पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं। सूखा-बीमा अनुदान और मेस्टन सहायता में कटौती से क्या लाभ होंगे, उसका वह हिसाब लगा रहे हैं। लेकिन मैं उनसे गंभीरता से पूछना चाहता हूं कि क्या यह छोटी और क्षुद्र उपलब्धियां प्रेसिडेंसी में आर्थिक स्थिरता को लाने में मदद कर पाएंगी? महोदय! मेरे विचार से यह मानना गलत होगा। या तो माननीय वित्त सदस्य हमें विश्वास दिलाएं कि हमारी समस्याओं के निदान स्वरूप इस प्रेसिडेंसी के प्रशासन के खर्च को कम करने की पर्याप्त संभावनाएं हैं, अथवा वह स्पष्ट रूप से बताएं कि हमारी आकांक्षाओं की पूर्ति कर लगाए बिना नहीं होगी। मैं आदरपूर्वक महामहिम गवर्नर के कल के भाषण का उल्लेख करना चाहता हूं, जिसमें उन्होंने संकेत किया है कि कर लगाने के मामले में विधान परिषद पूरी तरह जिम्मेदार है और आवश्यकतानुसार कर लगाना उसके अधिकार क्षेत्र में है। मैं स्वीकार करता हूं कि विधान परिषद को कर लगाने का अधिकार है। लेकिन मैं यह भी कहना चाहता हूं कि इन मामलों में पहल सरकार की तरफ से होनी चाहिए। सरकार को बताना चाहिए कि वह किस प्रकार का कर लगाना चाहती है? क्या सरकार ने ऐसा किया है? किंतु इसके विपरीत सरकार बिल्कुल चुप है। वह हमें बताना नहीं चाहती कि वह क्या करने जा रही है? यह नहीं कहा जा सकता कि कोई योजना बनाने के लिए उसके पास आंकड़े नहीं हैं। हम सब जानते हैं कि कर जांच समिति ने एक बहुत विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जिसमें कई सुझाव हैं, जो एक नई और उपयुक्त आर्थिक नीति को शुरू करने के लिए पर्याप्त हैं। मुझे विश्वास है कि यह सब माननीय वित्त सदस्य की मेज पर पड़ा हुआ है, लेकिन लगता है कि इस विषय में अभी तक कुछ भी नहीं किया गया है। महोदय! मैं समझता हूं कि स्थिति वास्तव में बहुत गंभीर है और यह बहुत उचित समय है कि माननीय वित्त सदस्य को इससे निबटने के लिए एक कुशल नीतिज्ञ की तरह फैसला करना होगा।