246 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
दृष्टिकोण यह है कि अगर आप यह असंभव शर्तें लगाएंगे, तो लोग संघ बनाने की बिल्कुल चिन्ता नहीं करेंगे। मेरे विचार से जो मुसलमान जिस किसी भी राजनीतिक विचारधारा को चुनना चाहते हैं, उन्हें उनकी पसंद की विचारधारा चुननी चाहिए। अगर वे सोचते हैं कि यदि उनका श्रमिक संघ मुस्लिम लीग की नीति का अनुकरण करने को तैयार नहीं है और उनके लिए श्रमिक संघ के होने का कोई फायदा नहीं है, तो हो सकता है वे किसी संघ में शामिल ही न हों। उसी तरह अगर अछूत महसूस करते हैं कि उन्हें अपने बच्चों की शिक्षा और उनके समुदाय से संबंधित अन्य सुविधाओं के लिए कुछ प्रावधान बनाने की अनुमति नहीं है, तो वे उस संघ का न होना ही पसंद करेंगे। आप ऐसा करके कौन सी स्थिति उत्पन्न कर रहे हैं। आप ऐसी स्थिति पैदा कर रहे हैं कि लोग कोई भी संघ न बनाने के लिए बाध्य हो जाएं। इसलिए मेरा निवेदन है कि यह ऐसा प्रावधान है, जिसकी परिकल्पना बहुत ही शांतिपूर्ण ढंग से की गई है।
महोदय! उपबंध 4 से 20 में दूसरा प्रश्न यह उठता है कि श्रमिक संघ के आंदोलन की स्थिरता पर इस विधेयक का क्या प्रभाव पड़ेगा? मान लें कि अंततः किसी श्रमिक संघ में मालिक के नियंत्रण से मुक्त होने की महत्त्वाकांक्षा उत्पन्न हो जाती है, तो इस विधेयक के उपबंधों में क्या कोई ऐसी गारंटी है कि वह संघ एक क्रियात्मक संघ के रूप में ही बना रहेगा। जहां तक मैं इस विधेयक के प्रावधानों का अध्ययन कर पाया हूं, उनके अनुसार एक बार पंजीकृत संघ उसी पंजीकरण को बनाए रखेगा। खंड 10 सबसे खतरनाक है। वह खंड संघ पर हमेशा एक तलवार की तरह लटका रहेगा; इसका अस्तित्व हमेशा संकट में रहेगा और यह कभी निश्चित नहीं हो पाएगा कि आज जो इसका विधिसम्मत अस्तित्व है। क्या वह कल भी बना रह पाएगा? क्योंकि अगर कोई विशेष परिस्थिति न पैदा हो, तो इसका पंजीकरण कभी भी रद्द किया जा सकता है और एक बार पंजीकरण रद्द हो गया, तो वह पूरा ढांचा मिट जाएगा जो बहुत मेहनत से और बहुत शक्ति लगाकर बनाया गया था। महोदय! इसमें आगे भी शरारत की गई है और वह यह कि संघ के पंजीकरण का रद्द होना विरोधी संघ या मालिक पर छोड़ दिया जाए, जिसका मतलब यह होगा कि विरोधी संघ को नष्ट करने के लिए विभिन्न श्रमिक व्यक्तियों के संघों के बीच आपसी दुश्मनी, आपसी ईर्ष्या व कड़ी प्रतिस्पर्धा होगी। इसलिए जो श्रमिक संघ विधेयक के तहत एक बार पंजीकृत हो गया है, उसके निरंतर अस्तित्व में रहने के लिए उसकी सदस्य-सूची में कर्मचारियों की कुल संख्या को 51 प्रतिशत होनी चाहिए। महोदय! मैं फिर पूछना चाहता हूं कि क्या किसी संघ के लिए यह दिखाना संभव होगा कि उसके पास कार्यरत कर्मचारियों की कुल संख्या के 51 प्रतिशत सदस्य हैं? यह एक दिलचस्प बात होगी। मैं मानता हूं कि मैं सदन को यह दिखा दूं कि कैसे श्रमिक संघ की सदस्यता साल-दर-साल घटती-बढ़ती है और मैं ये