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औद्योगिक विवाद विधेयक

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आंकड़े देता हूं, जो मैंने ग्रेट ब्रिटेन के आंकड़ों से लिए हैं। वर्ष 1892 में श्रमिक संघों की कुल सदस्य संख्या 15,76,000 थी। वर्ष 1910 में यह 25,65,000 हो गई थी। 1920 में यह 83,46,000 थी, लेकिन वर्ष 1934 में घटकर 44,41,000 रह गई। दस वर्षों में श्रमिक संघों की सदस्य संख्या 50 प्रतिशत घट गई। यहां हम एक उद्योग विशेष के आंकड़े ले रहे हैं। कृषि क्षेत्र में वर्ष 1920 मे कुल सदस्य 2,10,000 थे, जो 1932 में केवल 33,000 रह गए, उनकी संख्या 2,10,000 से घटकर 33,000 रह गई। 1920 में कोयला खनन उद्योग में सदस्य संख्या 11,15,000 थी। 1932 में यह घटकर 5,54,000 रह गई। धातु उद्योग में 1920 में यह संख्या 11,72,000 थी। 1932 में 5,27,000 थी। गृह निर्माण उद्योग में 1920 में सदस्यों की संख्या 5,63,000 थी। 1932 में वह घटकर 2,75,000 रह गई। परिवहन व आम मजदूरों की कुल सदस्य संख्या 1920 में 16,85,000 थी, जबकि 1932 में वह घटकर 6,60,000 रह गई। 1920 में श्रमिक संघ कांग्रेस की कुल सदस्य संख्या 65,05,000 थी, जबकि 1932 में इसमें केवल 36,13,000 सदस्य रह गए। महोदय! अगर इंग्लैंड जैसे देश में जहां श्रमिक संघवाद कर्मचारी के लिए सहज स्वाभाविक बात कही जा सकती है, वहां श्रमिक संघ की सदस्यता एक दशक में 50 प्रतिशत घटती-बढ़ती है, तो यह समझ में नहीं आता कि कोई कैसे उम्मीद कर सकता है कि हमारे इस देश में श्रमिक संघों का कोई भी संगठन हमेशा अपनी सदस्य-सूची में कुल श्रमिकों के 51 प्रतिशत की सदस्यता कैसे बनाए रख सकता है? अगर सदस्यता एक प्रतिशत तक गिर जाती है, तो अपना सारा कारोबार ही खत्म करना पड़ेगा। मैं पूछता हूं कि क्या यह तर्क संगत है, क्या यह ऐसी शर्त है, जिससे श्रमिक संघ आंदोलन का विकास सुनिश्चित हो सकेगा? अगर प्रत्येक पंजीकृत श्रमिक संघ को अपने पंजीकरण को रद्द समझने के लिए तैयार रहना पड़े और दिन-प्रतिदिन इसी पशोपेश में रहना पड़े, तो इस देश में श्रमिक संघवाद की अभिवृद्धि का भविष्य क्या है?

महोदय! एक खेदजनक लक्षण और भी है, जो गंभीर विचार का विषय हो सकता है, और यह कि इस विधेयक के तहत जिस व्यक्ति को संघ के पंजीकरण को रद्द करने का अधिकार दिया गया है, वह अपने ही संघ के पंजीकरण के लिए आवेदन नहीं कर सकता है। मैं इस प्रस्ताव के औचित्य को तब तो अच्छी तरह समझ सकता था, यदि पंजीकरण रद्द करने का अधिकार संघ के उन सदस्यों को दिया गया होता, जो इस तथ्य के कारण अपने संघ को पंजीकृत करवाने की स्थिति में होते कि उनके पास अपेक्षतया अधिक सदस्य हैं। मैं उस स्थिति को अच्छी तरह से समझ सकता हूं, लेकिन विधेयक के खंड 10 को पढ़कर यह पता चलता है कि किसी व्यक्ति को अपने संघ का पंजीकरण कराने की स्थिति में होना आवश्यक नहीं है। कहने का अभिप्राय यह है कि उसके पास किसी उद्योग में कार्यरत कर्मचारियों की कुल संख्या का 51 प्रतिशत भी सदस्यता के रूप में न हो। किसी शरारत करने वाले के